हैदराबाद की इस इमारत को कहा जाता है साउथ का ताजमहल

ब्रिटिश रेजिडेंसी बिल्डिंग, हैदराबाद में कर्नल जेम्स किर्कपैट्रिक ने 1803 में अपनी पत्नी खैर –उन — निशा के लिए बनवाई थी. अब यह उस्मानिया यूनिवर्सिटी कॉलेज फॉर वूमेन का हिस्सा है.

हैदराबाद, 6 जुलाई, 2025. हैदराबाद शहर अपनी ऐतिहासिक और भव्य इमारत के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी शहर के सुल्तान बाजार इलाके में एक ऐसी इमारत है, जो प्रेम की कहानी समेटे हुए हैं. यह ब्रिटिश रेजिडेंसी बिल्डिंग, जिसे कर्नल जेम्स किर्कपैट्रिक ने अपनी हैदराबादी पत्नी खैर –उन – निशा के लिए बनवाया था.
इस भवन का निर्माण 1803 में हुआ और यह उस समय ब्रिटिश एंबेसी के रूप में काम आता था. आज यह इमारत उस्मानिया यूनिवर्सिटी कॉलेज फॉर वूमेन का हिस्सा बन चुकी है और संग्रहालय के रूप में पर्यटकों के लिए खुली हुई है. इस भवन की दीवारें सिर्फ पत्थरों की नहीं बल्कि दो संस्कृतियों के मेल और प्रेम की निशानी है. जेम्स किर्कपैट्रिक, जो 1797 से 1803 तक हैदराबाद में ब्रिटिश रेजिडेंट रहे, खैर –उन — निशा की शालीनता और सुंदरता से इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने रेजिडेंसी को एक प्रेम स्मारक में परिवर्तित कर दिया. 2015 से 2022 के बीच इसका जीर्णोद्वार किया गया और अब यह पर्यटकों को अपने अंदर छिपी मोहब्बत की कहानी सुनने के लिए फिर से खोल दिया गया है.

ब्रिटिश रेजिडेंसी की प्रेम कहानी और ऐतिहासिक विरासत

यह इमारत सिर्फ ब्रिटिश प्रशासन का केंद्र नहीं थी, बल्कि हैदराबाद के इतिहास में एक ऐसा अध्याय है जहां एक अंग्रेज अफसर ने मुस्लिम कुलीन महिला के प्रेम में पड़कर सामाजिक बंधनों को तोड़ा. इस रेजीडेंसी में ब्रिटिश स्थापत्य और हैदराबादी शिल्पकला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जो इस प्रेम कहानी को और भी भावनात्मक बना देता है.

कैसे पहुंचे इस प्रेम स्मारक
ब्रिटिश रेजिडेंसी बिल्डिंग सुल्तान बाजार मेट्रो स्टेशन से महज 800 मीटर की दूरी पर यह स्मारक है. यहां आप बस, ऑटो या अपनी निजी वाहन से आराम से पहुंच सकते हैं. अब इस संग्रहालय में बदल दिया गया है, ताकि आम लोग भी इस अद्भुत प्रेम कहानी और वास्तुकला की भव्यता को महसूस कर सकें.