आखिरी पलों में कैसी थी हालत? बेटे ने बयां किया दर्द, नहीं रहे मशहूर अभिनेता मनोज कुमार
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
एक्टर मनोज कुमार 87 ने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में अंतिम सांस ली. ” है प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं. ” ये गाना सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाए…

मुंबई/ हैदराबाद, 4 अप्रैल, 2025. मां की चीख, पिता की कसम… कैसी है दिल्ली की उस घटना ने एबटाबाद में पैदा हुए हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी को मनोज कुमार बना दिया. हालांकि मनोज कुमार अपने बचपने से कभी जुदा नहीं हो पाए. बंटवारे के बाद दिल्ली के भावनात्मक संघर्षों याद करते हुए उन्होंने कहा था, ” भाई की मौत के बाद मैं बहुत गुस्से में था. मैं लाठी लेकर अंडरग्राउंड गया. नर्सेस को भी मारा और डॉक्टर को भी मारा. पिताजी आ गए थे, स्थिति को संभाला. दूसरे दिन उसे 2 महीने के बच्चे को यमुना जी में प्रवाह कर दिया. जैसे-जैसे वो नीचे जा रहा था, वैसे-वैसे लगता था, मैं डूब रहा हूं. ” सबसे बड़ा मैं… मुझसे छोटी बहन ललिता, जब पार्टीशन हुई मेरी मां ने एक बेटे को जन्म दिया, कुक्कू नाम था उसका. बीमार, मां भी बीमार. ” चेहरा झुकाए, सिर को हाथ से टिकाए… मनोज कुमार हर शब्द जोर देकर बोल रहे थे. मानो अतीत उनका पीछा छोड़ना चाहता था. ये अभिनेता भी अतीत की यादों में चटपटा कर रह जाना चाहता था. इस कहानी को मनोज कुमार आगे ले जाते हुए कहते हैं, ” हम रिफ्यूजी कैंप में, मां को तीस हजारी अस्पताल में रखा. रॉयट्स ( दंगे ) चालू थे. जब सायरन बजाता था तो डॉक्टर और नर्स अंडरग्राउंड चले जाते थे . मां मेरी तड़प रही थी. भाई मेरा तड़प रहा था. मां मेरी चीख रही थी कि डॉक्टर को बुलाओ. वो सब अंडरग्राउंड हो गए थे. मां ने चीख मारी, मेरा भाई कुक्कू चला गया था. 87 साल की लंबी जिंदगी जीने वाले मनोज कुमार अपनी बचपन की कहानी और भारत की आजादी के बाद की कहानी को एक साथ गूंथ देते हैं. जगह दिल्ली थी — इलाका किंग्सवे कैंप, हरसन लाइन, ओल्ड राजेंद्र नगर. देश के विभाजन के बाद हुए दंगों पाकिस्तान के एबटाबाद में पैदा हुए हरि कृष्ण गिरी गोस्वामी के मासूम मन पर जो असर डाला, वो उनके अवचेतन मस्तिष्क में ताउम्र रहा. उन्होंने अपने 2 महीने के छोटे भाई के शव को यमुना में जो समाधि दी उसका वर्णन झकझोर देने वाला है. आज से लगभग 10 से 12 साल पहले राज्यसभा टीवी के साथ बातचीत में मनोज कुमार ने कहा था. भारत और सिनेमा इंडस्ट्री का एक युग देखने वाले हरि कृष्ण गिरी गोस्वामी उर्फ मनोज कुमार उर्फ भारत कुमार का शुक्रवार( 4 अप्रैल 2025) को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया. मनोज कुमार का जन्म अविभाजित भारत और आज के पाकिस्तान के एबटाबाद में 1937 में हुआ था. जब वह 10 बरस के हुए तो भारत की आजादी के साथ उनके परिवार के विस्थापन के दिन आ गए. एबटाबाद का हरि कृष्ण गिरी गोस्वामी अपने जन्मभूमि और बचपन को कभी नहीं भूल पाया, उन्होंने कहा था, ” जिसका बचपन मर गया, वो आदमी मर गया. अपने अंदर के बचपन को मत मरने दो. वो रोता हुआ बचपन जो लाहौर से बिछड़ गया और दिल्ली से मुंबई में पल – बढ़कर दुनिया को अलविदा कह दिया. उन्हें शत-शत नमन और श्रद्धा सुमन अर्पित है .