आरक्षण की लिमिट तोड़नी होगी

आरक्षण की लिमिट तोड़नी होगी, जाति जनगणना से पहले ही पीएम मोदी से कांग्रेस की…

कांग्रेस नेता ने कहा कि जब 3 जुलाई 2015 को जाति जनगणना रिपोर्ट पेश की गई थी तो 16 जुलाई को नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित की गई थी

नई दिल्ली / हैदराबाद, 6 मई, 2025. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने जाति जनगणना के संबंध में विचार करने के लिए तीन बिंदु सुझाए हैं . इनमें एक प्रमुख मांग यह है कि आरक्षण की 50% की सीमा को खत्म किया जाए. खड़गे ने लिखा,’ मैंने 16 अप्रैल 2023 को आपको चिट्ठी लिखी थी और जाति जनगणना करने की कांग्रेस की मांग आपके सामने रखी थी. दुर्भाग्य से, मुझे उसका कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद, आपकी पार्टी के नेताओं और आप खुद इस जायज मांग को उठाने के लिए लगातार कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस से नेतृत्व पर निशाना साधा. मगर, अब आप खुद स्वीकार कर रहे हैं कि यह मन सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के हित में है.’ मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपील की है कि जाति जनगणना के विषय पर सभी राजनीतिक दलों से जल्द बातचीत की जाए और इस मामले में तेलंगाना मॉडल का उपयोग किया जाए . उन्होंने कहा कि राज्यों की ओर से पारित आरक्षण को तमिलनाडु की तर्ज पर संविधान की 9 वीं
अनुसूची में डाला जाए, आरक्षण की 50% की सीमा को खत्म किया जाए और निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू हो. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने खड़गे का 5 मई की तिथि वाला यह पत्र अपने एक्स हैंडल पर साझा किया. रमेश ने कहा, ” कांग्रेस कार्य समिति की 2 मई को हुई बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने सोमवार को प्रधानमंत्री को फिर पत्र लिखा. देश पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले को लेकर आक्रोश और पीड़ा से गुजर रहा था. इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने जातिगत जनगणना पर अचानक और हताशाजनक यू टर्न लिया.
खड़गे ने अपने पत्र में तीन बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट सुझाव दिए हैं.

तेलंगाना मॉडल को अपने जाने की मांग

पत्र में खड़गे ने कहा, ” केंद्र सरकार ने बिना किसी स्पष्ट विवरण के यह घोषणा की है कि अगली जनगणना ( जो वास्तव में 2021 में होनी थी ) में जाति को भी एक अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया जाएगा. ” खड़गे ने कांग्रेस शासित राज्य तेलंगाना में हुए जातिगत सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा,’ जनगणना से संबंधित प्रश्नावली का डिजाइन अत्यंत महत्वपूर्ण है . जाति संबंधी जानकारी केवल गिनती के लिए नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकत्र की जानी चाहिए. गृह मंत्रालय को जनगणना में पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए तेलंगाना मॉडल का उपयोग करना चाहिए. प्रक्रिया के अंत में होने वाली रिपोर्ट में कुछ भी छिपाया नहीं जाना चाहिए ताकि प्रत्येक जाति के पूर्ण सामाजिक- आर्थिक आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों, जिससे एक जनगणना से दूसरी जनगणना तक उनकी सामाजिक– आर्थिक प्रगति को मापा जा सके और उन्हें संवैधानिक अधिकार दिया जा सके. ” कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है,’ जाति जनगणना के जो भी नतीजे आएं, यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण पर मनमाने ढंग से लगाई गई 50% की अधिकतम सीमा को संविधान संशोधन के माध्यम से हटाना होगा. पत्र में खड़के ने कहा,’ अनुच्छेद 15 (5) को भारतीय संविधान में 20 जनवरी 2006 से लागू किया गया था. इसके बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. लंबे विचार विमर्श के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2014 को इसे बरकरार रखा . यह फैसला 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले आया.’ उनके मुताबिक, यह निजी शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है. खड़गे ने कहा कि संसद की एक स्थाई समिति ने 25 मार्च को उच्च शिक्षा विभाग के लिए अनुदान की मांग पर अपनी 364वीं रिपोर्ट में भी अनुच्छेद 15(5) को लागू करने के लिए नया कानून बनाने की सिफारिश की थी .