हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट
आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कार्यवाही जरूरी. पहलगाम हमले के बाद पूरा कश्मीर रोया
लखनऊ/ हैदराबाद, 11 मई, 2025. ” भारत और आतंकवाद ” विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक दीपक मिश्रा ने कहा कि आतंकवाद के स्थाई समाधान के लिए निर्णायक अभियान चलाना एवं सतत संघर्ष आवश्यक है . उन्होंने कहा आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, यह एक विधर्मी धारणा है. सभी को आतंकवाद को हिंदू मुसलमान के सांप्रदायिक चश्मे की बजाय देशद्रोह रूप में देखना चाहिए. आतंकियों के शिकार हिंदुओं के साथ-साथ मुसलमान भी हुए हैं. वैदेशिक नीति के लेखक दीपक मिश्र ने कहा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र कमजोर होने के कारण सामरिक निर्णयों में सरकार से ज्यादा सेना और उससे भी अधिक आतंकी समूहों की चलती है. ऐसे में सीजफायर के बाद भी सजग और चौकन्ना रहना पड़ेगा. पूरा देश आतंकी समूहों का सफाया चाहता है. आतंकवादियों को मिटाना द्विपक्षीय अथवा अंतरराष्ट्रीय सीजफायर अनुबंधों का उल्लंघन नहीं है. कश्मीर और भारत की आत्मा एक है. इस संकट की बेला में हम सभी कश्मीरियों के साथ हैं, आवश्यकता पड़ी तो कश्मीर भी चलेंगे. बौद्धिक सभा के कार्यालय स्थित पुस्तकालय में आयोजित संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए जम्मू कश्मीर पीस फाउंडेशन के अध्यक्ष फय्याज अहमद भट्ट ने कहा कि जिस दिन पहलगाम में मासूमों का खून आतंकियों ने बहाया, पूरा कश्मीर रोया था. एक नौजवान सादिक मासूमों को बढ़ाने की कवायद में शहीद हो गया. फय्याज अहमद भट्ट ने कहा कश्मीर का हर मुसलमान और हिंदू भारत व कश्मीर में अमन चाहता है जो आतंकियों की समूल सफाई के पहले मुमकिन नहीं है. उन्होंने संकट के समय कश्मीरियों के साथ खड़े होने के लिए सभी का आभार माना. वहीं, अध्यक्षता करते हुए लुआत्का अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडे ने कहा कि युद्ध निश्चित रूप से विभीषिका है फिर भी शांति के लिए यदि आतंकवाद से युद्ध अपरिहार्य हो तो पीछे नहीं हटना चाहिए. इस संगोष्ठी को किरी बारामूला से आए गनी डार, दौलत अली, जावेद अली, मोहम्मद गुलाम, अनुभव मिश्र ने जी अपने विचार रखे.