हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
इस साल जब 25 मई से 2 जून तक सूरज का रूद्र रूप देखने को मिलेगा,तो तैयार हो जाइए 9 दिन नौतपा में कुछ नया सीखने के लिए
भोपाल/ हैदराबाद, 12 मई, 2025. गर्मियों के दिनों में एक समय ऐसा आता है जब सूरज अपनी पूरी ताकत के साथ धरती पर चमकता है. इस दौर को ही नौतपा कहते हैं. नाम से ही समझ में आता है कि ये 9 दिन तपिश से भरे होते हैं. जब सूरज रोहिणी नक्षत्र में आता है, तब धरती का तापमान अचानक बढ़ जाता है. ये समय सिर्फ गर्मी का ही नहीं, बल्कि आस्था और सावधानी का भी होता है. आईए जानते हैं भोपाल के ज्योतिषी पंडित हितेंद्र शर्मा से- इस साल नौतपा कब शुरू हो रहा है, इसका असर क्या होगा और किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है.
इस बार कब शुरू होगा नौतपा ?
इस साल नौतपा 25 मई से शुरू हो रहा है. उसे दिन सुबह 3:15 बजे सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा. इसके बाद पूरे 9 दिन तक यानी 2 जून तक सूरज की तपिश चरम पर रहेगी. हालांकि, सूर्य 8 जून तक रोहिणी नक्षत्र में ही रहेगा फिर भी शुरुआती 9 दिन सबसे ज्यादा असर डालते हैं . 8 जून के बाद सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में चला जाएगा और 15 जून को मिथुन राशि में प्रवेश करेगा.
हाथ की तर्जनी माध्यम ये दो उंगलियां अगर हो एक बराबर, तो छिपे होते हैं आपके भीतर
कुछ खास राज, जानें इससे जुड़ी दिलचस्प और चौंकाने वाली बातें !
हर व्यक्ति के हाथ की बनावट कुछ अलग होती है.
किसी के हाथों में उंगलियों के आकार छोटा होता है, तो किसी के हाथों में लंबा. कई बार हाथ की दो उंगलियां बिल्कुल एक बराबर भी होती है, जैसे तर्जनी और मध्यमा. आमतौर पर मध्यमा यानी बीच की उंगली, तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर से थोड़ी लंबी होती है, लेकिन अगर आपके हाथ में ये दोनों उंगलियां एक बराबर है तो यह आपका स्वभाव, सोच और जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें बयां कर सकती है. पंडित हितेंद्र शर्मा के मुताबिक, हाथ की रेखाओं और अंगों की बनावट हमारे स्वभाव और सोच को दर्शाती है. उंगलियों का भी इसमें खास स्थान होता है. तर्जनी और मध्यमा उंगलियों का बराबर होना बहुत आम नहीं है, लेकिन जिन लोगों के साथ ऐसा होता है, उनका व्यक्तित्व कई मामलों में अलग माना जाता है.
सोच और कला में संतुलन
जिन लोगों की तर्जनी और मध्यमा बराबर होती है, वे आमतौर पर न तो बहुत भावुक होते हैं और न ही ज्यादा सख्त. इनका सोचने का तरीका संतुलित होता है. ये लोग भावनाओं और तर्क, दोनों को बराबर जगह देते हैं. इन्हें किसी भी स्थिति को समझने और सही फैसला लेने में समय तो लगता है, लेकिन ये जो भी निर्णय लेते हैं, वह काफी सोच समझकर होता है .
अच्छे बोलचाल में होते हैं माहिर
ऐसे लोग अपनी बातों को साफ और सीधे तरीके से दूसरों तक पहुंचाने में माहिर होते हैं. चाहे बातचीत हो या लेखन, ये लोग अपने विचारों को अच्छी तरह जाहिर कर सकते हैं. यही कारण है कि ऐसे लोग अक्सर शिक्षण, पत्रकारिता, भाषण, लेखन या काउंसलिंग जैसे विधाओं में निपुण होते हैं .
क्या है इनके कमजोर पक्ष ?
जहां इनके पास सोने की अच्छी समझ होती है, वहीं ये कई बार ज्यादा सोचने की वजह से परेशान भी हो जाते हैं. जब कोई बात इनकी सोच के मुताबिक ना हो, तो ये मानसिक रूप से बेचैन हो सकते हैं. ऐसे में दूसरों को खुश रखने की कोशिश भी बहुत करते हैं, लेकिन जब अपेक्षा पूरी नहीं होती, तो इन्हें अंदर से कष्ट पहुंचता है.
