
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए विधेयक पर कार्रवाई करने की समय सीमा तय करने के फैसले पर 14 सवाल भेजकर राय मांगी है. सुप्रीम कोर्ट का वह कौन सा फैसला है जिस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट 14 सवाल क्यों पूछे हैं और क्या राष्ट्रपति की ओर से सवालों पर मांगी गई राय देने के लिए सुप्रीम कोर्ट बाध्य हैं ?
नई दिल्ली/ हैदराबाद, 17 मई, 2025. विधानसभा से परित विधेयकों को लेकर राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए समय सीमा तय करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्र सरकार के बाद अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सवाल किए हैं. राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से 14 सवाल भेजकर राय मांगी है. हालांकि, राष्ट्रपति ने जिन सवालों पर राय मांगी है, उनमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन सभी सवाल फैसले के इर्द- गिर्द ही हैं. दरअसल, यह पूरा मामला तमिलनाडु से जुड़ा हुआ है. वहां के राज्यपाल आर एन कवि के खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके हस्तक्षेप की मांग की थी. याचिका में राज्य सरकार ने राज्यपाल पर जरूरी विधेयकों को लटकाने का आरोप लगाया था. मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस जेबी पार्दीवाला और आर महादेवन की पीठ ने राज्यपाल द्वारा विधेयकों को लंबे समय तक रोके जाने के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुना दिया. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा विधेयकों पर मंजरी/ अस्वीकृति करने/ पुनर्विचार के लिए भेजने की समय सीमा भी तय कर दी .
राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर जल्द ही बहस छिड़ गई. कानूनी के जानकारों ने कहा कि जब संविधान में राष्ट्रपति के लिए समय सीमा पर नहीं है तो क्या सुप्रीम कोर्ट न्यायिक आदेश के जरिए समय सीमा तय कैसे कर सकता है. अब इसी पर राष्ट्रपति ने सवाल भेजकर राय मांगी है.
राष्ट्रपति किन 14 सवालों पर मांगी है सुप्रीम कोर्ट से राय ?
जब राज्यपाल के पास अनुच्छेद 200 के तहत कोई विधेयक आता है तो उनके पास क्या-क्या संवैधानिक विकल्प होते हैं ?
क्या राज्यपाल विधेयक पर संविधान के तहत मिले विकल्पों का उपयोग करते समय कैबिनेट द्वारा दी गई सलाह और मदद के लिए बाध्य हैं ?
क्या राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 200 के तहत संवैधानिक विवेक का प्रयोग न्यायोचित है ?
क्या अनुच्छेद 361 राज्यपाल के फसलों पर न्यायिक समीक्षा पर पूरी तरह पाबंदी लगा सकता है ?
क्या राष्ट्रपति के फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है ?
जब संविधान में राष्ट्रपति के लिए अनुच्छेद 201 में कार्य करने के लिए भीम और समय सीमा तय नहीं है तो क्या अदालत समय सीमा तय कर सकती है ?
क्या राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीम कोर्ट से राय लेना अनिवार्य है ?
क्या राष्ट्रपति और राज्यपाल के फैसलों पर कानून लागू होने से पहले अदालत सुनवाई कर सकती है ?
क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 का प्रयोग कर राष्ट्रपति या राज्यपाल के फैसले को बदल सकता है ?
क्या राज्य विधानसभा में पारित कानून, अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल की स्वीकृति के बिना लागू किया जा सकता है ?
क्या संविधान की व्याख्या से जुड़े मामलों को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच को भेजना अनिवार्य है ?
क्या सुप्रीम कोर्ट ऐसे निर्देश/ आदेश दे सकता है, जो संविधान या वर्तमान कानून से मेल ना खाता हो ?
क्या केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही सुलझा सकता है ?
क्या राष्ट्रपति राय मांग सकती है ?
हां, संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत किसी तथ्य या कानूनी मामले पर राष्ट्रपति लोकहित में सुप्रीम कोर्ट की राय ले सकते हैं. इसके अलावा, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से जुड़े विवादों की सुनवाई के लिए अनुच्छेद 131 में सुप्रीम कोर्ट के पास मूल क्षेत्राधिकार है . इन मामलों में भी अनुच्छेद 143 (2) के तहत सुप्रीम कोर्ट की राय ली जा सकती है.
क्या सुप्रीम कोर्ट सलाह देने के लिए बाध्य हैं ?
नहीं, राष्ट्रपति द्वारा पूछे गए 14 सवाल भेजकर मांगी गई राय देने के लिए सुप्रीम कोर्ट बाध्य नहीं है. यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी कई दफा सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी गई.