‘ आंखों में आंसू, सामने जमींदोज हो रहे आशियाने…

मद्रासी कैंप इलाके में 370 झुग्गी झोपड़ियां और बस्ती है जो 60 सालों से यहां रह रहे हैं. 370 में से 215
झुग्गियों में रहने वाले परिवारों को दिल्ली स्लम और झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति 2015 के तहत पुनर्वास के लिए पात्र माना गया है, जबकि बचे 150 से ज्यादा परिवारों के पास कोई वैकल्पिक आवास नहीं है. वहीं, पात्र परिवारों को दिल्ली के बाहरी इलाके नरेला में फ्लैट आवंटित किए गए हैं जो यहां से लगभग 40 किमी दूर है


नई दिल्ली/ हैदराबाद, 4 जून, 2025 . दक्षिण पूर्वी दिल्ली के जंगपुरा क्षेत्र में स्थित मद्रासी कैंप को बीते रविवार सुबह बुलडोजरों से ढहा दिया गया. यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के तहत बारापुला नाले की सफाई और जाम खोलने के लिए की गई है. ताकि मानसून के दौरान जलभराव से बचा जा सके. हालांकि, इस कार्रवाई में 155 परिवारों को पुनर्वास से बाहर रखा गया, जिनकी आजीविका और भविष्य अब अनिश्चितता के गहरे साए में है. वहीं, अपनी आंखों के सामने अपने आशियाने को जमींदोज होते देख, महिलाओं और बच्चों की आंखों से आंसू छलक पड़े. गौरतलब है कि मद्रासी कैंप इलाके में 370 झुग्गी झोपड़ियां और बस्ती है जो बीते 60 सालों से यहां रह रहे हैं. 370 में से 215 झुग्गियों में रहने वाले दिल्ली स्लम और झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति 2015 के तहत पुनर्वास के लिए पात्र माना गया है. पात्र परिवारों को दिल्ली के बाहरी इलाके नरेला में फ्लैट आवंटित किए गए हैं जो यहां से लगभग 40 किमी दूर है.

पुनर्वास से बाहर 155 परिवार

वहीं, पुनर्वास से बाहर 155 परिवारों में से एक महिला ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि जब प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की तो मैं अपना बर्तनों को इकट्ठा कर रही थी. ताकि कुछ चीजों को बचाया जा सके, लेकिन जहां वह काम करती हैं वहां से लगातार फोन कॉल आ रहे थे और हर बार कॉल जंगपुरा में उनकी मैडम का था. हर बार एक ही सवाल कम पर क्यों नहीं आई? तो पुष्पा ने कहा, मैंने डेढ़ महीने तक छुट्टी नहीं ली, क्योंकि मुझे पता था कि कोर्ट का मामला खतरे की घंटी बजा रहा है और बाद में छुट्टियों की जरूरत पड़ेगी. फिर भी, मुझे लगातार कॉल्स आ रहे थे. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने नियोक्ताओं को पहले से सूचित नहीं किया था, तो उन्होंने जवाब दिया,’ क्या बोलें? वे कह रहे हैं’ तोड़ने में तुम्हारा क्या काम? बताइए, सड़क पर घर का सामान छोड़कर कैसे जाएं?’ पुष्पा उन 155 परिवारों में से एक हैं, जिन्हें पुनर्वास नहीं मिला. वे कहती हैं कि जो परिवार नरेला में शिफ्ट हो चुके हैं, वे पहले से ही चिंतित हैं — वहां घरेलू कामकाज का कोई अवसर नहीं है . वहां कौन पॉश एरिया है ? कोई बर्तन कपड़ा का काम नहीं मिलता . उन्होंने यह भी कहा,’ कोई नहीं पूछ रहा कि उनके घर अभी भी खड़ा है या नहीं. कोई नहीं आया कि देखें कि हमारे पास सोने के लिए जगह है या नहीं.

वोट नहीं डालने वालों के घरों पर चला बुलडोजर: पीड़ित परिवार

पत्रकारों से बातचीत में कम से कम 6 परिवारों ने दावा किया कि सर्वेक्षक प्रिंटेड सूचियों के साथ आए और सुझाव दिया कि उनके नाम इसलिए गायब है, क्योंकि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों में वोट नहीं दिया था.