वो राज नारायण जिन्होंने इंदिरा गांधी को धूल चटाई थी

लोहिया से मनमुटाव और फिर मांगी माफी

राजनारायण की राजनीतिक गुरु थे समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया. उनके अनुयायियों की बात मानी जाए तो जो रिश्ता राम और हनुमान का था, वो ही लोहिया और राज नारायण के बीच का था. लेकिन एक बार राम मनोहर लोहिया भी राज नारायण से नाराज हो गए थे. आनंद कुमार बताते हैं, ” कहते हैं कि जब राज नारायण राज्यसभा में आए तो उसे समय लोहिया की राय थी कि जो लोग लोकसभा चुनाव हार गए हों, उन्हें राज्यसभा या विधान परिषद में नहीं आना चाहिए. उसको वो पिछला दरवाजा मानते थे. वो खुद 1957 और 1962 का चुनाव हारे थे, लेकिन उन्होंने राज्यसभा के जरिए संसद पहुंचने से इनकार कर दिया था. ” राजनारायण गुरु का आदेश का पालन करने के लिए गुरु से आगे भी निकल जाते थे. वो जानते थे कि अगर वो संसद से गैर हाजिर हो जाएंगे तो हालत बिगड़ जाएंगे. उत्तर प्रदेश की राजनीति में और वो बाद में भी साबित हुआ. लेकिन डॉ. लोहिया कथनी और करनी की एकता को मानने वाले थे, इसलिए वो राज नारायण की इस हरकत से नाराज हो गए थे. “
” कहते हैं कि राजनारायण रोज उनके 7 गुरुद्वारा रकाबगंज के घर के सामने आकर बैठ जाते थे. अंदर खबर जाती थी कि राज नारायण बैठे हुए हैं और डॉ लोहिया नाराज होकर कहते थे,’ बैठे रहने दो उसको.’ कहते हैं एक दिन राजनारायण रोते हुए घर के अंदर प्रवेश कर गए और उससे सारी गांठ खुल गई और सारे मैल धुल गए. उन्होंने क्षमा भाव से लोहिया से कहा, कि ये मेरा पहला और आखिरी दोष होगा. आगे से मैं कोई ऐसी चीज नहीं करूंगा जिससे आपको तकलीफ पहुंचे. “

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