बाद में भी दे सकते हैं डॉक्यूमेंट्स…,’ विपक्ष के जबरदस्त दबाव के बाद बैकफुट पर चुनाव आयोग
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट
इससे पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर मतदाताओं को ऐसे दस्तावेज दिखाने के लिए कहा था, जो बहुत कम लोगों के पास थे. जिसको लेकर बिहार में घमासान मचा था.
पटना/ हैदराबाद, 6 जुलाई, 2025. बिहार में बढ़ते दबाव के बीच चुनाव आयोग को बैकफुट पर आना पड़ा है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ( सीईओ) के कार्यालय ने लोगों से कहा है कि अगर उनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं है तो वे बिना जरूरी दस्तावेजों के भी मतदाता फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं. बूथ – स्तरीय अधिकारियों ( बीएलओ ) को सभी भरे हुए, हस्ताक्षरित फार्म अपलोड करने के लिए कहा गया है, जबकि दस्तावेज बाद में जमा किए जा सकते हैं. इससे पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर
मतदाताओं को ऐसे दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया था, जो बहुत कम लोगों के पास थे. जिसको लेकर बिहार में घमासान मचा था . विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के इस फैसले को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए थे . विपक्षी नेताओं में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए थे. इतना ही नहीं इसको लेकर एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. साथ ही अपनी याचिका में चुनाव आयोग के फैसले को लेकर कई तरह के सवालिया निशान खड़े किए थे. हालांकि, एक तरह से कहा जाए कि अब चुनाव आयोग को अपने ही फैसले से पीछे हटना पड़ा है. हिंदी के अखबारों में छपे एक विज्ञापन में बिहार में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से कहा गया है, अपने गणना फॉर्म को दस्तावेजों और अपनी तस्वीर के साथ भरकर जल्द से जल्द बीएलओ के पास जमा करें. अगर आपके पास जरूरी दस्तावेज नहीं है, तो भरे हुए हस्ताक्षरित फॉर्म को बीएलओ को भेजें.’ हालांकि चुनाव आयोग (ईसी ) ने कोई नया आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन बिहार के सीईओ के कदम को लोगों के बीच घबराहट को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अंतिम फॉर्म जमा करने की समय सीमा सिर्फ दो सप्ताह दूर यानी ( 26 जुलाई) है.