बिहार में वोटर लिस्ट विशेष पुनरीक्षण गलत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ” एसआईआर प्रक्रिया में कोई बुराई नहीं है, लेकिन पहले किया जाना चाहिए था. अब जब चुनाव नजदीक हैं, तब इतनी बड़ी प्रक्रिया को 30 दिनों में पूरा करने की बात कही जा रही है. यह व्यवहारिक नहीं लगता है.”

नई दिल्ली/ हैदराबाद, 10 जुलाई, 2025. बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर ) की शुरुआत पर राजनीतिक विवाद छिड़ा हुआ है. विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इससे लाखों गरीब और हाशिए पर खड़े लोग वोटर लिस्ट से हट सकते हैं. कुछ विपक्षी दलों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी गई थी. इस मामले पर आज यानी गुरुवार को सुनवाई हुई जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग( ईसीआई ) से कुछ सवाल किया है. अदालत ने कहा है कि इस प्रक्रिया में कोई समस्या नहीं है, लेकिन इसे बहुत पहले शुरू किया जाना चाहिए था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ” एसआईआर प्रक्रिया में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसे सही समय पर क्या जाना चाहिए था. अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक है, तब इतनी बड़ी प्रक्रिया 30 दिनों में पूरा करने की बात कहीं जा रही है. यह व्यावहारिक नहीं लगता है. ” जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि इस प्रक्रिया को कृत्रिम या काल्पनिक करार देना सही नहीं है, क्योंकि इसमें कुछ हद तक तर्क है.

कोर्ट ने पूछे ये अहम सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग सेकहा, ” आप विशेष पुनरीक्षण के दौरान नागरिकता के सवालों में क्यों जा रहे हैं? यह गृह मंत्रालय ( एमएचए ) का क्षेत्राधिकार है. ” अदालत ने यह भी सवाल किया कि जब आधार कार्ड एक वैध पहचान दस्तावेज है, तो ईसीआई इसे स्वीकार क्यों नहीं कर रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, ” विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया ( एसआईआर ) में कोई बुनियादी समस्या नहीं है. लेकिन इसे चुनाव से स्वतंत्र और समय रहते किया जाना चाहिए था. “

इतनी देरी से क्यों ?
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा, ” जब यह प्रक्रिया पहले से भी की जा सकती थी, तो इतनी देरी से क्यों शुरू की गई? ” बता दें कि, चुनाव आयोग ने पहले कहा है कि यह प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत वोटर सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि चुनाव से कुछ महीने पहले अचानक इतनी बड़ी कवायद करना अनुचित है. चुनाव आयोग आधार कार्ड स्वीकार नहीं कर रहा है और लोगों से माता-पिता के दस्तावेज भी मांग रहा है. यह पूरी प्रक्रिया मनमानी और भेदभावपूर्ण है तथा इसका मकसद मतदाताओं को सूची से बाहर करना है, खासकर गरीबों, प्रवासी मजदूरों और कमजोर वर्गों को.