तेलंगाना में स्थानीय चुनाव होगी बीजेपी-कांग्रेस के साथ बीआरएस की भी अग्नि परीक्षा

तेलंगाना में जल्द ही स्थानीय निकाय चुनावों का ऐलान होने की उम्मीद की जा रही है. ऐसे कांग्रेस सरकार के कामकाज पर जनता जहां मुहर लगाएगी, वहीं, बीआरएस और बीजेपी की इन चुनावों में अग्नि परीक्षा होगा . कांग्रेस दक्षिण के इस राज्य पर 18 महीने पहले कब्जा किया था.

हैदराबाद, 10 जुलाई, 2025. तेलंगाना में अगले कुछ महीनो में स्थानीय चुनाव होने हैं, जिसके लिए बीजेपी– कांग्रेस और बीआरएस ने तैयारी शुरू कर दी है. ये स्थानीय चुनाव अलग-अलग हिसाब से तीनों पार्टियों की अग्नि परीक्षा होंगे. जहां यह कांग्रेस के करीब डेढ़ साल की राज्य सरकार का टेस्ट होगा वहीं, बीआरएस के लिए ये अपनी खोई हुई जमीन को पाने का मौका हो सकता है. बीजेपी इन चुनाव को अपनी जडें मजबूत करने के मौके के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है.

रेवंत के काम का होगा टेस्ट
स्थानीय चुनाव कांग्रेस के लिए अपनी 18 महीने पुरानी रेवंत रेड्डी सरकार का रिपोर्ट कार्ड देने का मौका भी होगा. वहीं, बीआरएस के लिए यह एक निर्णायक मोड़ की तरह होगा. बीआरएस इसका इस्तेमाल अपना खोया जनाधार पाने के लिए कर सकती है. 2023 विधानसभा चुनाव में बीआरएस 39 सीटों पर सिमट गई थी और उसे करीब 37% वोट शेयर मिला था. 2024 के लोकसभा चुनाव में तो उसे एक भी सीट नहीं मिली और वोट शेर घटकर सिर्फ 17% रहा. बीआरएस स्थानीय चुनाव को अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के मौके के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है. क्योंकि अब बीआरएस के अस्तित्व की भी परीक्षा होगी.

बीजेपी का जनाधार बढ़ाने का दावा

बीजेपी के एक नेता ने कहा कि हमारे लिए स्थानीय चुनाव तेलंगाना में अपनी बढ़ती पकड़ को साबित करने का एक मौका होगा. उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए एक सर्वे में बताया गया है कि आदिलाबाद, निजामाबाद और करीमनगर एरिया में बीजेपी का जनाधार बढा है और स्थानीय चुनाव में अच्छा करने पर यह पार्टी के आगे की राह भी आसान करेगा. बीजेपी ने राज्य में पहले ही संगठन को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है. बीजेपी ने हाल ही में तेलंगाना के लिए पूर्व एमएलसी एन. रामचंद्र राव को प्रदेश अध्यक्ष चुना है. वे एबीवीपी के नेता रहे हैं, जो संघ का छात्र संगठन है .

संघ से जुड़े रहे हैं रामचंद्र राव

बीजेपी ने संघ विचारधारा से लंबे वक्त से जुड़े नेता को अध्यक्ष बनाकर संगठन में विचारधारा और पुराने कार्यकर्ताओं की अहमियत पर फोकस किया है. 2023 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने जो उम्मीदवार बनाए उनमें से एक तिहाई ने तो नतीजों के कुछ महीने बाद ही पार्टी छोड़ दी थी. अब बीजेपी पुराने कार्यकर्ताओं पर भरोसा कर रही है. स्थानीय चुनाव के बहाने बीजेपी को संगठन मजबूत करने का मौका मिलेगा.