झूठे आरोपों में ननों की हुई गिरफ्तारी ?

छत्तीसगढ़ पुलिस ने दो ननों को अरेस्ट किया है, लेकिन इसने पार्टी की केरल इकाई को परेशानी में डाल दिया है.

ईसाई वोटो की अहमियत
यूडीएफ के सांसदों ने पिछले दिनों संसद के बाहर ननों की गिरफ्तारी का विरोध किया. इस विरोध प्रदर्शन में प्रियंका गांधी भी मौजूद थी, जो केरल के वायनाड से सांसद हैं. इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक असर इतना गहरा रहा कि केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने बजरंग दल को जिम्मेदार ठहराते हुए बीजेपी से ध्यान हटाने की कोशिश की . इसके साथ ही भाजपा पदाधिकारियों को जल्दबाजी में छत्तीसगढ़ भेजा गया ताकि ननों की रिहाई जल्द से जल्द कराई जा सके. बीजेपी की केरल में रणनीति राज्य में ईसाई समुदाय के एक छोटे हिस्से को साधने की रही है. बीजेपी का मकसद यह रहा है कि इसे लगभग एक तिहाई हिंदू वोट के साथ मिलकर माकपा के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट( एलडीएफ ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट( यूडीएफ ), दोनों को कमजोर किया जा सके. केरल एक ऐसा राज्य है जहां अल्पसंख्यकों की आबादी का खास कांबिनेशन देखने को मिलता है. यहां ईसाई आबादी 18.38 फीसदी और मुस्लिम आबादी 26.56 फीसदी है. जैन और अन्य समुदाय के लोगों की संख्या बहुत कम है. लेकिन कुल मिलाकर राजकीय 46 फ़ीसदी जनता अल्पसंख्यक समुदाय से हैं .

किस बात ने चर्च के नेतृत्व को सकते में डाला ?
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस आफ इंडिया के अध्यक्ष मार एंड्रयूज ताजत ने कोच्चि में पत्रकारों से कहा कि ” मानव तस्करी के आरोप में हुई ये गिरफ्तारियां बेहद चौंकाने वाली है. इन पर जबरन धर्मांतरण का भी आरोप लगाया गया है. प्रशासन की ये करवाई धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को चुनौती देती है जो सीधे तौर पर संविधान के खिलाफ है . उन्होंने कहा, ” यह ईसाइयों के उत्पीड़न की कई घटनाओं में से एक है. कुछ मामलों में तो पादरियों को अपने धार्मिक वस्त्र पहनने और देश में स्वतंत्र रूप से घूमने की आजादी तक नहीं दी गई. ” उन्होंने साफ कहा, ” हर तरफ डर का माहौल है. “