

गिरफ्तारी से केरल बीजेपी परेशान
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ पुलिस ने दो ननों को अरेस्ट किया है, लेकिन इसने पार्टी की केरल इकाई को परेशानी में डाल दिया है.
दुर्ग/ कोच्चि / हैदराबाद, 1 अगस्त, 2025. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य में महज 3 महीने बाद स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं, जिन्हें अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है. बीजेपी स्थानीय निकाय चुनावों में अपनी ताकत दिखाने और ज्यादा ईसाई वोट अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है लेकिन ननों की गिरफ्तारी से उसकी रणनीति को झटका लग सकता है. नंदन वंदना फ्रांसिस और प्रीति मैरी को 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया था. यह कार्रवाई बजरंग दल के एक सदस्य की शिकायत पर हुई, जिसने आरोप लगाया था कि ये नन मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण में शामिल हैं. असिसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट से जुड़ी दोनों ननों पर आरोप था कि वो तीन युवतियों ( उम्र 19, 21 और 24 साल ) को लेने छत्तीसगढ़ आई थी. इन युवतियों को आगरा स्थित एक संस्थान के रसोई विभाग में कम पर रखा गया था. उनके पास सभी वैध दस्तावेज और माता-पिता की अनुमति पत्र भी मौजूद थी. इन गिरफ्तारियों के बाद केरल के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं . दूसरी पार्टियां ये मुद्दा उठाने की तैयारी में है कि बीजेपी अब केरल में सबसे बड़े प्रभावशाली और संगठित ईसाई समुदाय सायरो– मालाबार के ‘ आम लोगों को भी नहीं बख्स रही है.’ यही वो समुदाय है जहां से पिछले कुछ सालों में बीजेपी को कुछ हद तक समर्थन मिला था. विशेषज्ञों के मुताबिक, ईसाई समुदाय में विश्वास बहाली की पीएम नरेंद्र मोदी की कोशिशों को इस घटना ने जोर से झटका दिया है. वहीं, बजरंग दल कार्यकर्ताओं की तेज करवाई और पुलिस की ओर से तुरंत ननों की गिरफ्तारी से ये मामला और गंभीर हो गया है. राजनीतिक विश्लेषक केए. जैकब बताते हैं कि” छत्तीसगढ़ और केरल की बीजेपी इकाइयों के बीच हितों का टकराव इस पूरे मामले में साफ दिखता है . यह बिल्कुल साफ है कि भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर अपने हितों को संतुलित नहीं कर पा रही है. “

ईसाई वोटो की अहमियत
यूडीएफ के सांसदों ने पिछले दिनों संसद के बाहर ननों की गिरफ्तारी का विरोध किया. इस विरोध प्रदर्शन में प्रियंका गांधी भी मौजूद थी, जो केरल के वायनाड से सांसद हैं. इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक असर इतना गहरा रहा कि केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने बजरंग दल को जिम्मेदार ठहराते हुए बीजेपी से ध्यान हटाने की कोशिश की . इसके साथ ही भाजपा पदाधिकारियों को जल्दबाजी में छत्तीसगढ़ भेजा गया ताकि ननों की रिहाई जल्द से जल्द कराई जा सके. बीजेपी की केरल में रणनीति राज्य में ईसाई समुदाय के एक छोटे हिस्से को साधने की रही है. बीजेपी का मकसद यह रहा है कि इसे लगभग एक तिहाई हिंदू वोट के साथ मिलकर माकपा के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट( एलडीएफ ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट( यूडीएफ ), दोनों को कमजोर किया जा सके. केरल एक ऐसा राज्य है जहां अल्पसंख्यकों की आबादी का खास कांबिनेशन देखने को मिलता है. यहां ईसाई आबादी 18.38 फीसदी और मुस्लिम आबादी 26.56 फीसदी है. जैन और अन्य समुदाय के लोगों की संख्या बहुत कम है. लेकिन कुल मिलाकर राजकीय 46 फ़ीसदी जनता अल्पसंख्यक समुदाय से हैं .

किस बात ने चर्च के नेतृत्व को सकते में डाला ?
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस आफ इंडिया के अध्यक्ष मार एंड्रयूज ताजत ने कोच्चि में पत्रकारों से कहा कि ” मानव तस्करी के आरोप में हुई ये गिरफ्तारियां बेहद चौंकाने वाली है. इन पर जबरन धर्मांतरण का भी आरोप लगाया गया है. प्रशासन की ये करवाई धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को चुनौती देती है जो सीधे तौर पर संविधान के खिलाफ है . उन्होंने कहा, ” यह ईसाइयों के उत्पीड़न की कई घटनाओं में से एक है. कुछ मामलों में तो पादरियों को अपने धार्मिक वस्त्र पहनने और देश में स्वतंत्र रूप से घूमने की आजादी तक नहीं दी गई. ” उन्होंने साफ कहा, ” हर तरफ डर का माहौल है. “

