घुटने तक पानी में निकली शवयात्रा, लोगों को राहत सामग्री मिलने की आस… बाढ़ में डूबे वाराणसी
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट

वाराणसी की वरुणा नदी के किनारे बसी गरीब बस्ती शैलपुत्री — अमरपुर और मडिया इस वक्त बाढ़ की सबसे भयानक मार झेल रही है . वहां सन्न कर देने वाली तस्वीर देखने को मिली है. कमर भर बाढ़ के पानी में एक शवयात्रा निकल रही थी. 80 वर्षीय शोभना देवी का निधन हो गया है. और परिजनों के पास कोई और रास्ता नहीं था. वे शव को कंधा देकर उसी पानी में से अंतिम यात्रा पर ले जा रहे थे.
वाराणसी/ हैदराबाद, 6 अगस्त, 2025. वाराणसी के घाटों पर जहां एक और सुबह की आरती और गंगा स्नान की परंपरा रही है, वहीं इस वक्त वही गंगा, बर्बादी की तस्वीर बनी हुई है . गंगा का जलस्तर भले ही धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन तटवर्ती इलाके अभी भी पूरी तरह डूबे हुए हैं. बाढ़ के पानी ने न केवल घरों को निगल लिया है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को भी पूरी तरह अस्त व्यस्त कर दिया है . सैकड़ो परिवारों के घर गंगा और वरुणा की बाढ़ में डूबे हुए हैं. कुछ ने राहत शिविरों में शरण ली है, लेकिन बड़ी तादाद अब भी घरों में फंसी हुई है, बिना किसी मदद और बिना किसी उम्मीद के.
कमर भर पानी से गुजरती दिखी शवयात्रा
वाराणसी की वरुणा नदी के किनारे बसी गरीब बस्ती शैलपुत्री, अमरपुर और मडिया इस वक्त बाढ़ की सबसे भयानक मार झेल रही है. वहां सन्न कर देने वाली तस्वीर देखने को मिली. कमर भर बाढ़ के पानी में से एक शवयात्रा निकल रही थी. 80 वर्षीय शोभना देवी गुजर गई और परिजनों ने शव को कंधा देकर उसी पानी में से अंतिम यात्रा पर ले जा रहे थे.
‘ रोज दुकान लगानी है साहब, वरना भूखे मरेंगे
वहीं,उसी बस्ती के रहने वाले सुभाष कुमार अपने ठेले से गोलगप्पे की रहड़ी लेकर बाढ़ के पानी में से निकलते नजर आए. उन्होंने बताया,’ हर दिन यही हाल है. सुबह कमर भर पानी में से ठेला लेकर निकलते हैं, दुकान लगाते हैं, शाम को फिर ऐसे ही लौटते हैं. कोई सुविधा नहीं है. लेकिन काम नहीं करेंगे तो खाएंगे क्या ?’
घर में बीमार पत्नी, बूढी मां, लेकिन नहीं जा सकते शिविर
एक अन्य निवासी ने बताया कि वे बाढ़ राहत शिविर नहीं जा सकते क्योंकि उनके घर में बीमार पत्नी और बुजुर्ग मां है. उन्होंने कहा,’ चोरी का डर है. पिछले वर्ष घर छोड़ा था, सब सामान चोरी हो गया. अब तो चाहे पानी चढ़े या घटे, यहीं रहना है. अब तक कोई राशन, कोई दवा, कोई सहायता नहीं पहुंची है.
‘ ताले टूट जाएंगे इसलिए घर नहीं छोड़ते’
बस्ती की ही बुजुर्ग महिला फूलमती देवी ने कहा कि वे घर में ही डटी हैं क्योंकि जैसे ही घर से हटेंगी, चोर ताले तोड़ देंगे. उन्होंने कहा,’ दो बार ऐसा हो चुका है. अब डर लगता है . कोई माइक से राहत बांटने की भी घोषणा नहीं हुई . हमें तो किसी ने पूछा तक नहीं.’
महिलाएं टकटकी लगाए देख रही हैं गंगा की धार
बाढ़ प्रभावित महिलाएं दरवाजे की चौखट पर बैठकर हर गुजरते पल के साथ यही पूछती हैं, अब कितना पानी घटा?, आज रात और बढ़ेगा क्या?’ जैसे सवाल उनकी चिंता और असहायता को बयां करते हैं. उनके घरों के निचले तल पानी में डूब चुके हैं, कुछ परिवार किराए के झोपड़े मे शरण लिए हुए हैं, राहत सामग्री कहीं नहीं है. बाढ़ प्रभावितों में प्रशासन और सरकार के प्रति गहरा रोष है . लोग कह रहे हैं कि टेलीविजन पर दावा किया जाता है कि राशन बंट रहा है, लेकिन हम तो कुछ नहीं आया. किसी के पास माचिस तक नहीं बची. बाढ़ राहत शिविरों में जिनके नाम नहीं चढ़े, उन्हें बाहर से ही कर्मचारी लोग भगा दे रहे हैं. वहीं, वाराणसी जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 80 सेमी ऊपर है .