कभी गरजी बंदूकें, कभी बाहुबली ही ‘ सरकार’, मोकामा के सियासी अखाड़े की अनंत…

पिछले 6 चुनावों से लगातार छोटे सरकार यानी अनंत सिंह ही मोकामा की सियासत में छाए हुए हैं. खुद विधायक बने और पत्नी को विधानसभा पहुंचाया. एके -47 और ग्रेनेड रखने के आरोपों में जेल में रहने…

मोकामा/ पटना/ हैदराबाद, 25 सितंबर 2025. पटना जिले में यूं तो 14 विधानसभा क्षेत्र हैं, लेकिन इनमें सबसे दिलचस्प चुनावी नजारा मोकामा में देखने को मिलता है. दाल का कटोरा कहे जाने वाले इस टाल क्षेत्र में कभी खूब बंदूकें गरजती थी. बाहुबली ही यहां के सरकार थे और उन्हीं का हुक्म चलता था. समय के साथ सिस्टम बदला और मोकामा भी विकास की पटरी पर दौड़ पड़ा. बीते 6 चुनावों से छोटे सरकार यानी अनंत सिंह लगातार मोकामा की सियासत पर छाए हुए हैं. खुद विधायक बने और फिर पत्नी को विधानसभा पहुंचाया. एके –47 और हैंड ग्रेनेड रखने के आरोपों में जेल में रहने के बाद कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है. एक बार फिर अनंत सिंह ने चुनावी मैदान में खुद उतरने का संकेत दिया है. मोकामा सीट का सबसे अधिक बार प्रतिनिधित्व करने में कांग्रेस आगे हैं. कांग्रेस पार्टी ने 1952, 57, 69, 72, 77, 80 और 85 में यहां से जीत दर्ज की थी. जगदीश नारायण सिंह पहले विधायक चुने गए थे. पूर्व केंद्रीय मंत्री कृष्णा शाही भी दो दफे लगातार विधानसभा में मोकामा से पहुंची थी. श्याम सुंदर सिंह धीरज ने 1980 और 85 में कांग्रेस को जीत दिलाई थी. बिहार में 1990 में सत्ता का मिजाज बदलने के बाद दोबारा कभी कांग्रेस को यह सीट नसीब नहीं हुई. छोटे सरकार नाम से चर्चित अनंत सिंह के बड़े भाई और पूर्व मंत्री दिलीप सिंह 1990 में जनता दल के टिकट पर चुनाव जीते और लगातार दो बार विधायक रहे. जबकि 2000 के चुनाव में जेल में रहते हुए सूरज भान सिंह ने दिलीप सिंह को निर्दलीय ही मात दे दी. सूरजभान 2004 में बलिया से लोकसभा जीतकर सांसद बन गए और 2005 के चुनाव में अनंत सिंह ने मोकामा सीट पर फिर से कब्जा जमाया. तब से मोकामा की सियासत उनके परिवार के आसपास सिमटी हुई है. बाहुबल की बदौलत अनंत सिंह जदयू, निर्दलीय और राजद के लिए यहां से जीत चुके हैं. 2022 में आर्म्स एक्ट मामले में सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी चली गई. इस वर्ष उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी राजद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरी और पति की सीट बचाने में कामयाब रही .

इस बार सूरजभान के परिवार से टक्कर होने की चर्चा.
जदयू के टिकट पर एक बार फिर अनंत सिंह के चुनावी मैदान में उतरने की संभावना है. केंद्रीय मंत्री लल्लन सिंह और बिहार में जदयू के मंत्री अशोक चौधरी के साथ अनंत सिंह की जुगलबंदी भी देखने को मिल रही है. एनडीए से अनंत सिंह की उम्मीदवारी ताई मानी जा रही है पर उनके सामने कौन होगा, इसे लेकर कयासों के बाजार गर्म है. माना जा रहा है कि ‘ लोक जनशक्ति पार्टी ( परस गुट ) से सूरजभान के परिवार से कोई उतर सकता है. यदि ऐसा हुआ तो मोकामा में चुनावी लड़ाई दिलचस्प होगी .