
सीटों की सियासत में उलझा महागठबंधन, नया फार्मूला ले आई कांग्रेस तो वाम दलों ने टप कर दिया खेल
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर मंथन तेज है. सूत्रों के मुताबिक, सीट शेयरिंग का फॉर्मूला भी लगभग तैयार कर लिया गया है, लेकिन कांग्रेस और वाम दलों की सीटों की मांग पर गतिरोध बना हुआ है. वहीं झामुमो और पशुपति कुमार पारस की पार्टी के लिए गुंजाइश खोजी जा रही है.
पटना/ हैदराबाद, 8 अक्टूबर बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर रास्साकशी चरम पर पहुंच गई है. सूत्रों की मानें तो सीट शेयरिंग का फार्मूला लगभग तैयार कर लिया गया है, लेकिन कांग्रेस और वाम दलों की डिमांड पर सहमति नहीं बन पाई है. राष्ट्रीय जनता दल ( राजद ) 125 से 130 सीटें अपने पास रखना चाहती है, जबकि कांग्रेस और वाम दल अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति में जुटे हैं. उधर, मुकेश सहनी ने डिप्टी सीएम की दावेदारी के साथ 60 से घटाकर 20 सीटों की मांग की है. अब घोषणा का इंतजार है. इससे पहले जानते हैं आखिरकार कहां पेंच फंसा हुआ है और इंडिया ब्लॉक में कैसी खींचतान चल रही है जो बिहार में महागठबंधन के भीतर टेंशन का कारण है.
कांग्रेस और वाम दलों की डिमांड से फंसा पेंच
बता दें कि वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 70 सीटें मिली थी, लेकिन इस बार आरजेडी उसे 50 से 55 सीटें देने के मूड में है. जबकि कांग्रेस 70 से 75 सीटों की मांग कर रही है. वाम दलों के साथ भी यही स्थिति है और उन्हें 25 से 30 सीटें देने की बात चल रही है, जबकि वे 60 से 65 सीटों की मांग पर अड़े हैं. हाल में ही डी राजा ने अकेले ही 24 सीटों की मांग रखकर राजद की टेंशन बढ़ा दी, जबकि इससे पहले दीपांकर भट्टाचार्य ने सीपीआई एमएल के लिए कम से कम 35 सीटों की मांग रखी है और पूरे कुनबे के लिए 60 से ऊपर सीटों की डिमांड है. यही कारण है कि अब महागठबंधन में कांग्रेस और वाम दलों के रूख को लेकर टकराव साफ दिखने लगा है.
महागठबंधन में सियासी हलचल तेज
दूसरी ओर सूत्र यह भी बताते हैं कि वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने अपनी डिमांड 60 सीटों से घटाकर 20 कर दी है, लेकिन साथ ही डिप्टी सीएम पद पर दावेदारी जारी है और इसकी चुनाव से पहले ही घोषणा करने की मांग कर रहे हैं. वहीं, झामुमो और पशुपति कुमार पारस की लोजपा की सीटों की मांग से भी महागठबंधन में खींचतान है . दरअसल, झामुमो ने 12 सीटों की मांग की है, लेकिन राजद नेताओं के मुताबिक, उसे 3 से 5 सीटें मिल सकती है. जबकि पशुपति पारस की लोजपा ने अभी तक सीटों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन खबरों के मुताबिक, लोजपा को महागठबंधन में 5 से 7 सीटें दी जा सकती है. पशुपति पारस ने कहा है कि उनकी पार्टी सम्मानजनक संख्या में उम्मीदवार उतारेगी .
महा गठबंधन में सीट शेयरिंग का ‘ तेजस्वी प्लान ‘ रेडी, लिस्ट देख मुकेश सहनी को होगी टेंशन
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन सीट शेयरिंग का मसला अब भी उलझा हुआ है. कांग्रेस, वीआईपी, झामुमो, वाम दल जैसे घटक दल अपनी शर्त तेजस्वी यादव तक पहुंचा रहे हैं. यूं तो इस वक्त पटना में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का सरकारी आवास बिहार की पॉलिटिक्स का एपिक सेंटर बना हुआ है. सूत्रों की मानें तो महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर तेजस्वी यादव ने अपना फार्मूला बना लिया है. इस फार्मूले से तमाम घटक दलों को अवगत करा दिया गया है. सूत्र बताते हैं कि तेजस्वी यादव ने राजद के लिए 130 से 135 सीटें अपने पास रखने की बात कही है. जबकि कांग्रेस को 55 से 58 सीटें ऑफर की है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अभी भी 60 सीटों की डिमांड पर अड़ी हैं. भले ही वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी 60 सीटों की डिमांड कर रहे हैं, लेकिन तेजस्वी यादव उन्हें 14 से 18 सीटें देने को तैयार हुए हैं. सूत्र बताते हैं की सहनी अपनी डिमांड से कम सीटों पर भी राजी होने को तैयार हैं, लेकिन उनकी शर्त है कि उन्हें चुनाव से पहले डिप्टी सीएम का चेहरा घोषित किया जाए. तेजस्वी यादव ने अपने सीट शेयरिंग फार्मूले में हेमंत सोरेन की झामुमो को 3, पशुपति पारस की आरएलजेपी को 2 सीटें देने को तैयार हैं. इस बीच तमाम दलों के नेताओं का लालू यादव के आवास पर पहुंचने का सिलसिला जारी है . अब देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव सीट शेयरिंग के अपने फार्मूले पर घटक दलों को कितना राजी कर पाते हैं.