बिहार में फिर हुआ जहरीली शराब का तांडव

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद जहरीली शराब का सिलसिला जारी है. सारण जिले के मसरख और पानापुर इलाके में जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की जान चली गई है, जबकि कई लोग अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. शराबबंदी के बीच शराब कांड में हुई पांच लोगों की मौत की इस घटना ने एक बार फिर शासन और प्रशासनिक व्यवस्था एवं शराबबंदी की हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं.


छपरा, 14 मार्च 2026. सारण जिले के मसरख और पानापुर शराब कांड में अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अलग-अलग अस्पतालों में 7 से 8 लोगों का उपचार जारी है. इनमें से पांच लोगों को छपरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सारण के पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार ने शराब कारोबारियों पर कार्रवाई का दावा करते हुए कहा है कि एसआईटी जल्द ही इस घटना में शामिल लोगों को गिरफ्तार करेगी . वहीं, डीएम वैभव श्रीवास्तव ने आम लोगों से भी अपील की है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है लिहाजा लोग शराब पीना बंद करें. इस संदर्भ में शराब कांड के शिकार शख्स मिंटू नाम के व्यक्ति की पत्नी का कहना है कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में खुले तौर पर शराब मिलती है.

शराबबंदी के दावों के बीच मौत का कारोबार
बता दें कि, सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों में मिंटू का नाम भी शामिल है जिसकी आंखों की रोशनी चली गई. मिंटू मजदूरी का काम करता था और काम कर वापस घर लौटते वक्त रास्ते में उसने शराब पी थी. शराब पीने के बाद से ही मिंटू की तबीयत बिगड़ने लगी और अब स्थिति यह है कि मिंटू की आंखों की रोशनी जा चुकी है. मिंटू की पत्नी नीतू देवी पति की हालत देखकर परेशान है और शराबबंदी पर सवाल खड़े कर रही हैं .+ बिहार में शराबबंदी पर बड़ा सवाल+ मिंटू की पत्नी का कहना है कि यदि बिहार में शराबबंदी है तो लोग थैली में लेकर गांव-गांव घूम कर शराब कैसे बेच रहे हैं? मिंटू की तरह ही चार अन्य लोग भी सदर अस्पताल में भर्ती हैं जो शराब का सेवन करने के बाद बीमार हैं. उधर, सारण के पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार पीडितों से मुलाकात के बाद शराब कारोबारी पर कार्रवाई का दवा किया है और कहा है कि मामले में एसआईटी का गठन किया जा चुका है और एसआईटी जल्द ही इस घटना में शामिल लोगों को गिरफ्तार करेगी.

सरण डीएम बोले —- कार्रवाई जारी

इस बीच छपरा डीएम वैभव श्रीवास्तव ने शुक्रवार देर शाम सदर अस्पताल पहुंचकर बीमार लोगों से मुलाकात की और इलाज की मुकम्मल व्यवस्था करने के निर्देश दिए . दरअसल, पिछले 24 घंटे में जिला प्रशासन ने 160 जगहों पर छापेमारी की और भारी मात्रा में शराब को नष्ट किया. इस दौरान कई शराब कारोबारी गिरफ्तार भी किए गए. ऐसे में इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने छापेमारी और कार्रवाई का दवा तो किया है, लेकिन पांच की मौत और कई लोगों की बिगड़ी हालत ने शराबबंदी की जमीनी सच्चाई को फिर से सामने ला दिया है.
सवाल यही है कि जब कानून इतना सख्त है तो आखिर जहरीली शराब बिहार के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच कैसे रही है ?