बंगाल में बवाल : मालदा में वोटर लिस्ट पर विरोध

पश्चिम बंगाल चुनाव में गर्मी बढ़ने लगी है. गुरुवार को कोलकाता के भवानीपुर में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के समर्थन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रोड शो किया . भवानीपुर से ममता बनर्जी भी चुनाव मैदान में है . पिछली बार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री रहते हुए नंदीग्राम विधानसभा से चुनाव में हरा दिया था. इस बार भी यहां का मुकाबला दिलचस्प होने वाला है . मालदा की घटना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त पश्चिम बंगाल में हुए विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है, मुख्य न्यायाधीश ने पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारी के घरों पर संज्ञान लिया.

कोलकाता/ मालदा, 3 अप्रैल 2026. सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के 9 घंटे के घेरेबंदी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को करीब फटकार लगाई है और इसे चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने एवं अधिकारियों का मनोबल गिराने का ‘ पूर्व नियोजित, सुनियोजित और प्रेरित ‘ प्रयास बताया. वोटरों के नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर ) में लगे तीन महिला अधिकारियों सहित सात न्यायिक अधिकारियों को प्रखंड विकास अधिकारी के कार्यालय में बंधक बना लिया गया. कोर्ट ने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती का भी आदेश दिया है. दरअसल, पश्चिम बंगाल के मालदा में गुरुवार से एक नया विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. इस बार पुराने मालदा प्रखंड के मंगलवारी इलाके में. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वैध दस्तावेज़ होने के बावजूद उनके कई नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. गुरुवार को रात के समय कुछ घंटे के लिए खोले जाने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 12 को फिर से अवरुद्ध कर दिया गया . प्रदर्शन कर रहे लोगों ने टायरों में आग लगा दी और सड़क को बस लगाकर अवरुद्ध कर दिया . स्थिति पर नजर रखने के लिए मालदा पुलिस स्टेशन की टीमों और सीएपीएफ के जवानों को नाकाबंदी स्थल पर तैनात किया गया है .

लोकतंत्र का वो ‘ जहर ‘ जिसे बंगाल चुनाव में फैला रही हर बड़ी पार्टियां……. पश्चिम बंगाल: मालदा प्रोटेस्ट मामले का मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार, 35 लोग हुए अरेस्ट एवं एनआईए की रेड जारी क्यों हो रहा प्रदर्शन बुधवार को कालियाचक प्रदर्शन में उठाई गई मांगों को लेकर गुरुवार को पुराने मालदा प्रखंड में विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सभी वैध दस्तावेज़ होने के बावजूद मतदाता सूची से उनके नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. राष्ट्रीय राजमार्ग बुधवार सुबह से ही मालदा के विभिन्न इलाकों में काफी देर तक अवरुद्ध रहा एवं न्यायिक अधिकारियों को को भी घेर लिया गया . हालांकि, देर रात उन्हें छोड़ दिया गया. लेकिन इलाके में दबा हुआ तनाव अभी भी बरकरार है. गुरुवार सुबह से सड़कों पर पुलिस ने चौकियां लगा रखी है,
जहां रात में विरोध प्रदर्शन हुए थे . वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग 12 और मालदा– मोथाबारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी पुलिस का पहरा है. पुलिस के मुताबिक, खुफिया शाखा को भी सतर्क रहने को कहा गया है.

मालदा जिले में मुख्यमंत्री का रैली

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी गुरुवार को मालदा जिले के वैष्णव नगर में चुनावी रैली को संबोधित किया. इससे पहले, पुराने मालदा प्रखंड में एक नया विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया.
ईसीआई ने पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक से उस घटना पर रिपोर्ट मांगी है, जिसमें मालदा जिले के कालिया चौक में वोटरों के ” तार्किक विसंगति ” श्रेणी के तहत वर्गीकृत किया जाने के न्यायिक निर्णय में शामिल सात न्यायिक अधिकारियों, दिन में तीन महिलाएं भी शामिल हैं, को उन वोटरों के समूह द्वारा घेर लिया गया और बंधक बना लिया गया, जिनके नाम किस प्रक्रिया में हटा दिए गए थे.

बंगाल सरकार को भी लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के डीएम और पुलिस अधीक्षक के रवैये पर भी सख्त टिप्पणी की. सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि दोनों अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे. सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक बंधक बना कर रखे जाने का यह मामला बेहद गंभीर है. उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत को चुनौती देने जैसा है. कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार को भी फटकार लगाई. चीफ जस्टिस इंडिया ने कहा कि मालदा में हुई हिंसा की घटना न्यायपालिका पर दबाव बनाने के साथ-साथ कानून व्यवस्था को भी चुनौती देने की तरह है. अदालत न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में सरकार के रवैये को लचर बताया और कहा कि इस मामले में तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई.

बंगाल के वरिष्ठ अफसर को कारण बताओं नोटिस जारी
अदालत ने इस मामले में राजकीय वरिष्ठ अधिकारियों — मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को कारण बताओं नोटिस जारी किया है. अदालत ने उनके रवैये को बेहद निंदनीय बताते हुए पूछा है कि समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए . मामले की अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारियों की वर्चुअल मौजूदगी अनिवार्य की गई है और उनसे अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों तैनाती कराएं.

ममता बनर्जी के घर के सामने रथ छोड़कर कार में क्यों बैठ गए अमित शाह ?
कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी के घर के सामने अमित शाह के रथ से उतरने को लेकर सस्पेंस बना रहा. मौके पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच एक ही नारेबाजी और तनाव था . हालांकि, शुरुआत में इसे सुरक्षा कारण माना गया, लेकिन बाद में पता चला कि नॉमिनेशन का मुहूर्त निकालने के कारण अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी रथ छोड़क कार से निकल गए.