सामाजिक सरोकार के पुरोधा समाजसेवी ठाकुर सुरेंद्र सिंह किसी परिचय का मोहताज नहीं

समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
राष्ट्र का उत्थान और सामाजिक समस्याओं का निदान तभी निकल जा सकता है, जब समाज के हर वर्ग अपने-अपने स्तर पर जागरूक होंगे. आज का भारत युवाओं का भारत है और यह आवश्यक है कि हम युवाओं को जागरूक करें ताकि राष्ट्रीय हित के साथ-साथ समाज का भी भला हो सके

हैदराबाद, 4 अप्रैल 2026. इन्हीं विचारों को लेकर यहां के प्रख्यात सामाजिक संगठक ठाकुर सुरेंद्र सिंह पिछले कई दशकों से सामाजिक चेतना को मजबूत करने के लिए जगह-जगह और डगर– पहुंच रहे हैं एवं युवाओं सहित समग्र समाज में सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं . इस कर्मयोगी का जन्म तब के आंध्र प्रदेश और अब तेलंगाना के हैदराबाद में सन 1972 में हुआ. इनके पिता का नाम ठाकुर रघुनाथ सिंह और माता का नाम भारती देवी था. हालांकि, 5 वर्ष की आयु तक इनका लालन पोषण माता-पिता नहीं किया. लेकिन बाद में वे बीमार रहने लगे और माता-पिता के पास उपचार में कमी होने लगी. इस कारण उन्हें नानी के पास भेज दिया गया. जहां उनका उपचार भी हुआ और लालन पोषण भी. हालांकि, उनकी शिक्षा दीक्षा हैदराबाद के ही एक शासकीय विद्यालय में हुई. इस दौरान अल्प आयु में इनकी शादी भी कर दी गई. दरअसल, पांच भाई और दो बहनों में दूसरे नंबर पर रहे ठाकुर सुरेंद्र सिंह की अभिरुचि बचपन से ही सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में रही थी और इस कारण उन्होंने सामाजिक आज राजनीतिक क्षेत्र में पदार्पण किया. जनवरी 2006 में ठाकुर सुरेंद्र सिंह ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ली और सामाजिक कार्यों में बढ – चढ़कर हिस्सा लेने लगे. धीरे-धीरे उन्हें सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में खूब नाम और शोहरत मिली. फिर भी उनके मन में सामाजिक उत्थान को लेकर एक जुनून था और एक ललक भी. उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में विशेषकर क्षत्रिय समाज ( राजपूत) में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक पिछड़ेपन मिटाने की लड़ाई लड़ने की ठानी और इसके लिए सामाजिक संगठन के माध्यम से समग्र समाज में समरसता और युवाओं में चेतना जागने के लिए बिना किसी स्वार्थ के झंडा बुलंद करना शुरू कर दिया, जो आज भी जारी है . जैसा कि अक्सर होता है, जब लोग शिखर पर होते हैं और लोकप्रियता हासिल होने लगता है तब प्रतिपक्ष के लोग भी सक्रिय हो जाते हैं और उन्हें दबाने की भरसक प्रयास करते हैं. यही हुआ ठाकुर सुरेंद्र सिंह के साथ भी. लेकिन उन्होंने हार नहीं माना और सजगता के साथ लक्ष्य के प्रति मजबूत बने रहे . इसी का प्रतिफल है कि उन्हें सामाजिक और राजनीतिक पड़ाव को आगे ले जाने में सफलता मिली. हालांकि, इस क्रम में इन्होंने महाराणा प्रताप जागृति मंच का स्थापना किया और उसके बतौर संस्थापक अध्यक्ष महाराणा प्रताप के सिद्धांतों और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से वार्षिक कैलेंडर छपवाकर हजारों लोगों में वितरण करवाया . इतना ही नहीं, महाराणा प्रताप के विचारों को आलेख एवं जयंती कार्यक्रम सह अन्य उत्सवों का आयोजन कर प्रचार — प्रसार का क्रम जारी रखे हुए हैं. बता दें कि जब यहां महाराणा प्रताप जागृति मंच के तत्वावधान में रैलियों का आयोजन होता है तब आयोजित कार्यक्रम में भारी संख्या में सभी वर्गों के लोग शिरकत करते हैं और इसी सामाजिक समरसता कार्यक्रम को लेकर निरंतर निस्वार्थ भाव से सेवा कार्य करने के लिए उन्हें कई अवॉर्डों से सम्मानित भी किया गया है. वर्ष 2008 में 19 जून को उन्हें रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा आंध्र प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल एनडी तिवारी द्वारा सम्मानित किया गया था. एक खास मुलाकात में उन्होंने बताया कि अब इनका सिर्फ एक ही लक्ष्य है कि सभी समाज लोगों में सामाजिक समरसता और भाईचारा स्थापित किया जाए और इसके साथ ही महाराणा प्रताप के सिद्धांतों और विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाए. शायद इसी वजह से हैदराबाद शहर के भू लक्ष्मी माता मंदिर के समीप चौराहे पर स्थित महाराणा प्रताप की 21 फीट ऊंची अष्टधातु की प्रतिमा एवं 27 फीट तलवार प्रस्थापित कराने में प्रतिष्ठित समाजसेवी ठाकुर सुरेंद्र सिंह का बहुत बड़ा योगदान रहा है. वे कहते हैं कि जब तक उनके शरीर में एक बूंद भी रक्त बचा रहेगा, तब तक वे अपने जीवन को सामाजिक कार्य में लगाते रहेंगे.’ जय महाराणा प्रताप ‘ सामाजसेवी ठाकुर सुरेंद्र सिंह को उत्कृष्ट समाज सेवा के लिए आंध्र प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी सम्मानित करते हुए.

