बिहार में फस गया नए सीएम का पेच, हरिवंश को राज्यसभा भेजने के बाद जेडीयू बदला स्टैंड

समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
बिहार की राजनीति में एक बार फिर से जेडीयू और बीजेपी में तनातनी दिखने लगी है. यह सब कुछ 1 दिन के अंदर हुआ जब जदयू की ओर से ठुकरा गए हरिवंश को राष्ट्रपति ने तीसरी बार राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया. जानिए अब क्या चल रहा है एनडीए के अंदर.
पटना, 12 अप्रैल 2026. बिहार में नई सरकार का ग्रहण काल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है . हर दिन एक नया सवाल और हर पूरे दिन इन सवालों से जूझता एनडीए नेतृत्व . यह कोई एक दिन, 2 दिन या हफ्ता भर का नहीं, लगभग 1 महीने से बिहार में कौन बनेगा मुख्यमंत्री, इसी पर समीकरण घटाए– बढ़ाए जा रहे हैं. शुक्रवार को जब राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता ले रहे थे, तब लगा बिहार के नए मुख्यमंत्री का काउंटडाउन शुरू हो गया है. लेकिन उसी वक्त कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए, जिसने पूरे मामले में पेच फंसा दिया.
जदयू की नई डिमांड !
कौन बनेगा बिहार का सीएम के खेल में यही नया पेच है. अब डिमांड है कि मुख्यमंत्री जदयू की तरफ से होना चाहिए. कहा जा रहा है कि बिहार की जनता ने 2025 से 2030, फिर से नीतीश के नारे पर मैंडेट दिया था. ऐसे में जदयू का मुख्यमंत्री नहीं होगा तो यह जनता के मैंडेट का अपमान होगा. जदयू सूत्रों की माने तो जीडीयू के भीतर निशांत फोबिया हावी हो गया है. पार्टी के शीर्ष नेताओं और युवा विधायकों ने माना है कि जनता के मैंडेट का सम्मान करना होगा तो जदयू का यानी निशांत को मुख्यमंत्री बनना होगा. दूसरी शर्त यह है कि अगर बीजेपी का सीएम होगा तो विधानसभा स्पीकर,गृह, सामान्य प्रशासन जदयू के हाथ में होगा. यानी कुल मिलाकर अभी भी सरकार का फार्मूला ही आगे भी चलेगा. सारी पावर किसी एक घटक दल के हाथ में नहीं रहेगी. इस पर सहमति बनने के बाद ही आगे की राह तय होगी.
हरिवंश नारायण के राज्यसभा जाने से भी जदयू नाराज हैं .
जदयू के नेतृत्व को इस बात का भी गुरेज है कि आखिर हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा भेजने का क्या तुक है. अगर भेजना ही था तो इस बिंदु पर विचार विमर्श क्यों नहीं हुआ? पार्टी के तमाम बैठकों से गायब रहने वाले हरिवंश नारायण को राज्यसभा भेज दिया गया, जबकि जदयू ने उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी निकाला और आप ( बीजेपी) उसे राज्यसभा भेज दे रहे हैं. आप उन्हें पुरस्कृत कर रहे हैं. जिन्हें जेडीयू ने व्हिप के विरुद्ध जाकर अपनी मर्जी का किया. जेडीयू सूत्रों का कहना है कि इन सब के बाद भी हरिवंश को राज्यसभा भेजकर बीजेपी आखिर क्या संदेश देना चाहती है ?
बीजेपी पर प्रतिकूल प्रभाव
बीजेपी के सियासी गलियारे की माने तो यह जब तक बयानों में चल रहा था, कब तक बीजेपी को लगा कि यह सब मिल बैठकर तय कर लिया जाएगा. लेकिन जेडीयू के नेतृत्व के कुछ प्रश्नों से बीजेपी हतप्रभ है. नतीजा यह कि अभी तक जो बात चल रही थी कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होगा, इस पर अब नए सिरे से विचार किए जाने तक की भी तैयारी हो चुकी है. कुल मिलाकर एक ही दिन में बहुत कुछ बदलता दिख रहा है.
बीजेपी की कोर कमेटी की
बैठक टली और विजय चौधरी का बयान+ शायद यही वजह रही कि दिल्ली में विनोद तावडे के घर शुक्रवार की शाम 6 बजे से होने वाली कोर कमेटी की बैठक भी स्थगित कर दी गई . इसके बाद सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा समेत बीजेपी की कोर टीम के तमाम बड़े नेता वापस पटना लौट गए. उधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा पद की शपथ दिलाने विजय चौधरी जब पटना लौटे तब पत्रकारों ने पूछा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? विजय चौधरी ने कहा कि ‘ सब हो जाएगा.’ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शपथ ले ली है, अब तो बिहार के मुख्यमंत्री जल्द तय हो जाएंगे . लेकिन इसके साथ ही विजय चौधरी ने स्पष्ट कहा कि शपथ लेने का मतलब सरकार बनाना थोड़े ना हो जाता है. इसके लिए इस्तीफा देना जरूरी होता है.