कांग्रेस अधिवेशन : संघ विरोध और जातीय राजनीति पर आगे बढ़ेंगे राहुल गांधी…!

कांग्रेस की कोशिश गुजरात की धरती से भाजपा, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधी चुनौती देने की है. वो इसमें कितना सफल हो पाएंगे, यह तो आगामी चुनावों के नतीजे में पता चलेगा.

अहमदाबाद/ हैदराबाद, 9 अप्रैल, 2025. पिछले महीने राहुल गांधी गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में थे, तब उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं पर भाजपा के लिए काम करने का आरोप लगाया था. यह और बात है कि अहमदाबाद में ही कांग्रेस पार्टी ने अपना अधिवेशन कर लिया. गुजरात कांग्रेस के सभी नेता अपने केंद्रीय दल के वरिष्ठों की सेवा करते नजर आए. कांग्रेस की कोशिश गुजरात की धरती से भाजपा, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधी चुनौती देने की है. वो इसमें कितना सफल हो पाएंगे, यह तो आगामी चुनावों के नतीजों में पता चलेगा. हालांकि, किसी नई रणनीति के बजाय संघ और जातीय राजनीति के इर्द – गिर्द ही घूमता नजर आ रहा है. पार्टी की निर्भरता पहले की भांति गांधी परिवार पर ही बनी हुई है. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस पार्टी को देश में 99 सीटें मिली थी, तब पार्टी नेताओं ने जमकर जश्न मनाया था . 99 सीटों पर जीत का सेहरा राहुल गांधी के सिर पर बांधा गया था . हालांकि, लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद 99 सीटें जीतने का जोश कांग्रेस पार्टी में अब तक बना हुआ है. लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी एंग्री यंग नेता की भूमिका में बने हुए हैं . पार्टी भी उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुकाबले में खड़ा करने का कोई अवसर नहीं छोड़ पा रही है. सड़क से लेकर संसद तक राहुल गांधी की एक अलग छवि गढ़ी जा रही है. वैसे, अहमदाबाद में कांग्रेस के अधिवेशन में राहुल गांधी के दिए भाषण से एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि वह जातीय राजनीति के मैदान में पार्टी को पूरी तरह उतारने के लिए आतुर हैं . राहुल गांधी ने अधिवेशन में दिए अपने भाषण में कहा कि कांग्रेस दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण को साधती रही और अति पिछड़ा जातियां ( ओबीसी ) हमसे दूर चली गई . यह और बात है कि एक समय कांग्रेस का नारा था कि न जात पर न पात पर, इंदिरा जी की बात पर, मुहर लगेगी हाथ पर. ओबीसी को आरक्षण की सिफारिश करने वाले मंडल कमीशन के विरोध में सबसे बड़ा भाषण राहुल गांधी के पिता स्वर्गीय राजीव गांधी ने संसद में दिया था. शायद ओबीसी तभी से कांग्रेस से नाखुश है . ब्राह्मण भी राम मंदिर आंदोलन के बाद भाजपा के साथ जुड़ते चले गए. दलितों का बड़ा वर्ग अब भी कांग्रेस के साथ है . हालांकि, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में बहुजन समाज पार्टी के उदय के साथ दलित शिफ्ट हुए है. जहां-जहां क्षेत्रीय दल जैसे समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सत्ता में आए, वहां मुस्लिम कांग्रेस से छिंटक गया. हालांकि, मुसलमानों को दोबारा अपने फोल्ड में लाने की कांग्रेस की कोशिशें तेज हो चली है. राहुल गांधी का रहे हैं कि मुस्लिम हितों को लेकर वह पीछे नहीं हटेंगे. यह और बात है कि यह कोशिशें उसके सहयोगी दलों को रास नहीं आ रही है. राहुल गांधी का जोर भले ही मुस्लिम हितों पर अडिग रहने का है, लेकिन इसे लेकर कई बार उनकी पार्टी के नेता भी असहज नजर आते हैं. पार्टी के मुस्लिम हित ने हिंदुओं के बड़े वर्ग को भाजपा की ओर शिफ्ट किया है . अनुच्छेद 370, नागरिकता संशोधन कानून पर कांग्रेस का रुख देश के बहुसंख्यकों को रास नहीं आया है. पिछले दिनों संपन्न प्रयागराज महाकुंभ और सद्गुरु के कार्यक्रम में शामिल होने पर जिस तरह से कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी. के. शिवकुमार की पार्टी के अंदर आलोचना हुई, उसने भी कांग्रेस को लेकर बहुसंख्यकों को निराश किया. अहमदाबाद अधिवेशन में कांग्रेस ने एक बार फिर सरदार वल्लभभाई पटेल के बहाने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधा है . पार्टी ने अपने अधिवेशन को सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर बने मेमोरियल में रखा. पार्टी ने याद दिलाया कि कैसे सरदार वल्लभ भाई पटेल ने संघ पर प्रतिबंध लगाया था? पार्टी ने इस मेमोरियल में अपने अधिवेशन को विशेष बताया. यह और बात है कि गुजरात में ही बने स्टैचू ऑफ यूनिटी को देखने आज तक राहुल गांधी नहीं गए. कांग्रेस के नेता स्टैचू ऑफ यूनिटी पर जाने से परहेज करते हैं.

कांग्रेस अधिवेशन : राहुल गांधी ने उठाया जाति जनगणना का मुद्दा, वक्फ कानून को बताया संविधान पर आक्रमण
गुजरात के अहमदाबाद में दो दिवसीय कांग्रेस अधिवेशन का आज दूसरा दिन कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अधिवेशन को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने जाति जनगणना और वक्फ कानून को लेकर अपनी बात रखी और भाजपा एवं संघ पर जमकर हमला बोला.

ट्रंप के टैरिफ पर बोले राहुल
अमेरिकी तारीफ के मुद्दे पर राहुल गांधी ने कहा, पहले मोदी जी अमेरिका जाते थे. राष्ट्रपति ट्रंप के गले मिलते थे. अब ट्रंप ने नए टैरिफ लगा दिए. मोदी जी की चूँ तक नहीं निकली. जनता का ध्यान वहां न जाए, संसद में ड्रामा करवाया. सच यह है कि आर्थिक तूफान आने वाला है. कोरोना के समय मोदी जी ने लोगों से ताली बजवाई थी. अब कहां छिप गए हैं ?