दिल्ली की ‘ इस यूनिवर्सिटी के अंबेडकर जयंती कार्यक्रम में हंगामा, छात्र कर रहे भूख हड़ताल
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट
दिल्ली की अंबेडकर यूनिवर्सिटी का कैंपस भारत के संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती पर शासकीय छुट्टी की वजह से बंद है. गेट पर ताला लगा है और कई गार्ड तैनात हैं . उस पार एक बड़े पेड़ के नीचे छात्र संगठन’ स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ‘ से जुड़े छात्र भूख हड़ताल कर रहे हैं
नई दिल्ली/ हैदराबाद, 19 अप्रैल, 2025. यह भूख हड़ताल पिछले 8 दिनों से चल रही है . अंबेडकर यूनिवर्सिटी में एक छात्रा के साथ कथित रैगिंग से शुरू हुआ विवाद अब लोग तांत्रिक अधिकारों के लिए छात्र आंदोलन तक पहुंच गया है. आंदोलन कर रहे छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी की प्रशासन ने बिना कारण बताए कथित रैगिंग के मामले को उठाने वाले तीन छात्र को 1 साल के लिए निलंबित कर दिया था. क्या घटना बीते फरवरी की है .
मार्च में निलंबित किए गए तीन छात्र
छात्रों का आरोप है कि बीते शुक्रवार को जब पांच छात्र नेताओं ने निलंबित छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया तो उन्हें भी प्रशासन में जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया. वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन में पांच और छात्रों को निलंबित करने के फैसले का बचाव करते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने यूनिवर्सिटी के वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया और सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की . मीडिया से बातचीत करते हुए रजिस्ट्रार नवलेंद्र कुमार सिंह ने दावा किया कि छात्रों ने उनकी और वाइस चांसलर अनु सिंह लाठेर की कारों का रास्ता रोका. रजिस्ट्रार ने दावा किया, ” वह मेरी कार से लटक गए और वीसी की कार को आगे नहीं बढ़ने दिया. पुलिस और सुरक्षा गार्ड्स को दखल देना पड़ गया . हमने पुलिस को शिकायत दी है और इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज करवाई जाएगी .” रजिस्ट्रार ने मार्च में तीन छात्रों को निलंबित करने के बारे में कहा कि इन छात्रों को मीडिया में गलत बयान देने और एक संवेदनशील विषय पर राजनीति करने के लिए निलंबित किया गया था.
हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी ने जिन छात्रों को रैगिंग के आरोप में निलंबित किया था उन्हें तो बहाल कर दिया गया है, लेकिन रैगिंग के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों का निलंबन बरकरार रखा है . वहीं, शुक्रवार को निलंबित किए गए छात्रों ने रजिस्ट्रार के आरोपों को खारिज करते हुए पत्रकारों से कहा कि छात्र संगठन सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कुलपति तक पहुंचाना चाहते थे. एसएफआई की छात्र नेता और अंबेडकर यूनिवर्सिटी छात्र संघ की महासचिव शरण्या ने पत्रकारों से कहा, ” हम सिर्फ अपनी बात कुलपति तक पहुंचाना चाहते थे. हमने उनसे मिलने का वक्त मांगा था जो नहीं मिला. हमने लिखित रूप में भी गुजारिश की थी, लेकिन हमारी कोई बात नहीं सुनी गई. जब हमने कुलपति से अपनी बात कहनी चाही तो हमें पीटा गया और घसीटा गया.” शरण्या का आरोप है कि मर्द सुरक्षा कर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की. इस घटनाक्रम के वीडियो में भी सुरक्षा गार्ड शरण्या को यूनिवर्सिटी के गेट से खींचते दिख रहे हैं . मार्च में निलंबित किए गए छात्रों में नादिया, अनन और हर्ष के निलंबन को वापस लेने की मांग कर रहे थे.
आठ दिनों से भूख हड़ताल
सोमवार को अंबेडकर जयंती के मौके पर यूनिवर्सिटी की तरफ से आयोजित वार्षिक अंबेडकर व्याख्यान के दौरान भी कुछ छात्रों ने प्रदर्शन किया. हाथ में अंबेडकर के पोस्टर लेकर छात्र इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के व्याख्यान हॉल में कुलपति के सामने खड़े हो गए. छात्र संगठन अंबेडकर यूनिवर्सिटी में लोकतंत्र बहाल करने की मांग कर रहे हैं.