
नहीं रहे ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप फ्रांसिस, शोक में दुनिया के 1.4 अरब लोग
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
वेटिकन / हैदराबाद, 21 अप्रैल, 2025. कैथोलिक ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का 88 साल की उम्र में निधन हो गया है. वेटिकन के मुताबिक, स्थानीय समय सुबह 7 बजकर 35 मिनट पर पोप ने अंतिम सांस ली . पोप फ्रांसिस इतिहास के पहले लेटिन अमेरिकी पॉप थे. पोप फ्रांसिस के निधन की खबर से दुनिया भर के 1.4 अरब कैथोलिक अनुयायी शोक में डूब गए हैं.
अपने 12 साल के कार्यकाल के दौरान पोप फ्रांसिस कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते रहे थे . वेटिकन द्वारा अपने टेलीग्राम चैनल पर प्रकाशित बयान में कार्डिनल केविन फैरल ने कहा, ” सोमवार की सुबह 7:35 बजे ( 0535 जीएमटी ) रोम के बिशफ़, फ्रांसिस, अपने पिता के घर लौट गए. ” पीएम नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि परम पूज्य पोप फ्रांसिस के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है. दुख की इस घड़ी में, वैश्विक कैथोलिक समुदाय के प्रति मेरी संवेदनाएं. पोप फ्रांसिस को दुनिया भर के लाखों लोग हमेशा करुणा, विनम्रता, और आध्यात्मिक साहस के प्रतीक के रूप में याद रखेंगे. छोटी उम्र से ही उन्होंने प्रभु ईसा मसीह के आदर्श को साकार करने के लिए खुद को समर्पित कर दिया था. उन्होंने गरीबों और वंचितों की लगन से सेवा की. जो लोग पीडित थे, उनके लिए उन्होंने आशा की भावना जगाई . मैं उनके साथ अपनी मुलाकातों को याद करता हूं और समावेशी व सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से बहुत प्रेरित हुआ. भारत के लोगों के प्रति उनका स्नेह हमेशा संजोया जाएगा . उनकी आत्मा को ईश्वर की गोद में शांति मिले .
यहूदी– विरोधी भावनाओं पर जताई थी चिंता
पोप फ्रांसिस ने रविवार को अपने अंतिम ईस्टर संबोधन में विचार की स्वतंत्रता और सहिष्णुता की वकालत की थी. उन्होंने बेसिलिका की बालकनी से 35 हजार से अधिक लोगों की भीड़ को ईस्टर की शुभकामनाएं दी, लेकिन अपनी पारंपरिक” उर्बी एट ओरबी “( शहर और विश्व के लिए) आशीर्वाद को पढ़ने का कार्य एक सहयोगी को सौंप दिया. अपने संदेश में उन्होंने कहा,” धर्म की स्वतंत्रता, विचार की स्वतंत्रता, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दूसरों के विचारों का सम्मान किए बिना शांति संभव नहीं है. ” उन्होंने यहूदी– विरोधी भावनाओं को चिंता जनक बताते हुए गाजा की स्थिति को” नाट कीय और निंदनीय ” करार दिया.
1.4 अरब कैथोलिक अनुयायी शोक में
फ्रांसिस के निधन की खबर से दुनिया भर के 1.4 अरब कैथोलिक अनुयायी शोक में डूब गए हैं. उनके नेतृत्व में चर्च ने सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और गरीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया था. उनके निधन के साथ ही वेटिकन में नए पोप के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, लेकिन फिलहाल पूरी दुनिया अपने प्रिय धर्म गुरु के जाने के गम में डूबी है. खबर है कि पोप फ्रांसिस का आज रात 8 बजे बेटी कर में अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा. उनके वेटिकन स्थित सेंट मार्था निवास पर कार्डिनल केविन जोसेफ फैरल पोप का शव ताबूत में रखेंगे. पिछले कई महीनो से पोप स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. उन्हें 14 फरवरी को रोम के जेमली अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनका निमोनिया और एनीमिया का इलाज चल रहा था. वे 5 हफ्ते तक फेफड़ों में इंफेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती थे. इलाज के दौरान कैथोलिक चर्च के मुख्यालय वाटिका ने बताया कि पोप को ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में किडनी फेल होने के लक्षण दिख रहे थे . हालांकि, 14 मार्च को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था.
