भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव, पड़ोसी देश किसके साथ ?

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. गुरुवार को दोनों देशों ने एक — दूसरे पर
कार्रवाई का दावा किया

नई दिल्ली/ हैदराबाद, 9 मई, 2025. गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ‘ ऑपरेशन सिंदूर ऑनगोइंग ऑपरेशन है.’ इसके बाद गुरुवार रात को भारत ने कहा कि जम्मू, पठानकोट और उधमपुर के मिलिट्री स्टेशन पर पाकिस्तान में हमला किया है, जिसे बेअसर कर दिया गया. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने हमले की बात से इनकार किया है. वहीं, भारत के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि ” विश्वसनीय जानकारी के मुताबिक, लाहौर में एक एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट कर दिया गया है. पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने भारत के 25 ड्रोनेस मार गिराए हैं. लेकिन हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं. इस तनाव पर दोनों देशों के पड़ोसियों का क्या रूख हो सकता है, कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि मिडिल ईस्ट इनसाइट्स प्लेटफार्म की संस्थापक डॉक्टर शुभदा चौधरी कहती हैं कि,” अगर आप देखें तो भारत और पाकिस्तान के पड़ोसी देशों में सामाजिक- आर्थिक रूप से निचले तबके के लोग ज्यादा है . भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो जिन लोगों पर इसका आर्थिक असर ज्यादा होगा, उनकी संख्या बहुत बड़ी है. ” शुभदा चौधरी कहती है कि इन सभी देशों की अर्थव्यवस्था कोविड महामारी के बाद से संघर्ष कर रही है, इसलिए ऐसे देशों के लिए आर्थिक हित ज्यादा महत्वपूर्ण है. उन्हें लगता है कि भारत और पाकिस्तान के पड़ोसी इस कोशिश में लगे हैं कि यह तनाव जल्द खत्म हो.

छोटी अर्थव्यवस्था वाले पड़ोसी देश

अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार और भूटान जैसे पड़ोसी देशों के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव कई मायनों में काफी अहम है. शुभदा चौधरी कहती हैं, ” अगर भारत और पाकिस्तान में संघर्ष काफी समय तक खींचता है तो अलग-अलग पड़ोसियों पर इसका अलग-अलग असर होगा . नेपाल का भारत के साथ 60 फ़ीसदी ट्रेड होता है, वो प्रभावी तो हो सकता है. पोर्ट और ट्रेड रूट के मामले में नेपाल को परेशानी हो सकती है. नेपाल और भारत के बीच लंबी सीमा है और नेपाल चाहेगा कि यह तनाव कम हो, जबकि चीन इस स्थिति का फायदा नेपाल के साथ संबंध को आगे बढ़ाने में कर सकता है. उनके मुताबिक, ऐसा आर्थिक संकट भूटान के साथ हो सकता है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा तो वहां का पर्यटन उद्योग भी प्रभावित होगा. दक्षिण एशिया की भू राजनीति के जानकारी और साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर धनंजय त्रिपाठी मानते हैं कि भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव पर अफगानिस्तान को छोड़कर बाकी देश तटस्थ रहेंगे. उनका मानना है कि अन्य सभी पड़ोसी देश इस मामले में खामोश ही रहेंगे . धनंजय त्रिपाठी का कहना है, ” भारत इस क्षेत्र में एक बड़ी अर्थव्यवस्था है और छोटे पड़ोसी देश भारत के साथ कई तरह की आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं. श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों के लिए पर्यटन से होने वाली कमाई काफी अहम हैं और वे चाहेंगे कि यह तनाव जल्द खत्म हो. ” भारत और श्रीलंका के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है और श्रीलंका के हालिया आर्थिक संकट के दौर में भारत ने उसकी काफी मदद की है. हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका यात्रा भी की थी . विदेश मामलों के जानकार कमर आगा भी इस बात से सहमत दिखते हैं. उनका कहना है कि पड़ोसी देशों के साथ भारत का व्यावसायिक संबंध है. कमर आगा कहते हैं, ” अगर संघर्ष बढ़ता है तो यह अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा क्योंकि युद्ध के दौरान रक्षा खर्च बढ़ जाता है और इसमें रोजगार नहीं मिलता है. ऐसे में बांग्लादेश को बड़ा नुकसान हो सकता है. क्योंकि बांग्लादेश की मौजूदा सरकार पाकिस्तान के करीब जा रही है. जबकि भारत का बड़ा निवेश बांग्लादेश में है. ” हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच चीन के रुख पर कई लोगों की नजर है. चीन के पाकिस्तान से करीबी संबंध रहे हैं और भारत के साथ भी उसके कारोबारी हित जुड़े हुए हैं. जबकि चीन खुद मौजूदा समय में अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर में उलझा हुआ है, इससे चीन की खुद की अर्थव्यवस्था पर भी संकट देखे जा रहे हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर एक सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वे मौजूदा हालात को लेकर चिंतित हैं. “