राष्ट्रीय हित के ऊपर राजनीति ?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की आतंकवादी नीति को दुनिया भर में बेनकाब करने के लिए भारत का पक्ष रखे जाने वाले संसदीय प्रतिनिधि मंडल को लेकर हो रही राजनीति में राष्ट्र हित को पीछे छोड़ दिया गया है.

नई दिल्ली/ हैदराबाद, 19 मई, 2025. केंद्र सरकार ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और उसके खिलाफ शुरू किए गए’ ऑपरेशन सिंदूर ‘ पर दुनिया भर के देशों तक भारतीय पक्ष पहुंचने के लिए जिस मल्टी पार्टी डेलिगेशन की घोषणा की गई है, उसको लेकर जबरदस्त राजनीतिक विवाद हो रहा है. तृणमूल कांग्रेस ( टीएमसी) ने इस प्रतिनिधिमंडल से अपना नाम वापस ले लिया है. वहीं, कांग्रेस का कहना है कि सरकार अपनी मर्जी से सदस्यों का नाम तय नहीं कर सकती . टीएमसी का कहना है कि केंद्र सरकार को विपक्षी दलों से बात करके प्रतिनिधि चुनने चाहिए थे. यह प्रतिनिधिमंडल अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देश, दक्षिण पूर्वी एशिया और अफ्रीकी देशों तक जाकर इसके बारे में पूरी जानकारी देगा. लेकिन, जिस प्रतिनिधिमंडल को ऑपरेशन सिंदूर देश की एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए बनाया गया है, उसी पर राजनीतिक हितों की वजह से विवाद किया जा रहा है .

‘ तृणमूल का प्रतिनिधि कौन होगा, केंद्र कैसे चुनेगा ‘

टीएमसी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी को सर्व दलीय प्रतिनिधि मंडल के लिए नाम भेजने का कोई अनुरोध नहीं मिला. उन्होंने कहा,’ वे अपनी मर्जी से सदस्य का नाम तय नहीं कर सकते. यह उनका चुनाव नहीं है, पार्टी ( टीएमसी ) तय करेगी. अगर वे अनुरोध करते हैं तो मूल पार्टी तय करेगी, जैसी की प्रथा है. हम विदेश मामलों की नीतियों पर केंद्र सरकार के साथ पूरी तरह से हैं.’ खबरें है कि टीएमसी ने केंद्र सरकार को बता दिया है कि केंद्र सरकार द्वारा नामित पार्टी सांसद यूसुफ पठान प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होंगे. बनर्जी ने पूछा,’ केंद्र सरकार कैसे तय कर सकती है कि तृणमूल का प्रतिनिधि कौन होगा? उन्हें विपक्षी दलों के साथ चर्चा करनी चाहिए थी कि कौन सी पार्टी किसे भेजेगी.

राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीतिकरण नहीं करने का दावा

कहा जा रहा है कि तृणमूल के लोकसभा सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने स्वास्थ्य कारणों से प्रतिनिधिमंडल में जाने से मना कर दिया था, उसके बाद सरकार ने पठान को चुना. बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ सरकार के साथ है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को अच्छी नीयत दिखानी चाहिए और प्रतिनिधियों का नाम तय करने से पहले संबंधित पार्टियों से सलाह लेनी चाहिए. ममता बनर्जी ने कहा, भाजपा सत्ता में है. वे अपनी पार्टी के लिए फैसला ले सकते हैं, लेकिन कांग्रेस या आम आदमी पार्टी के लिए नहीं…’ हालांकि, प्रतिनिधिमंडल से पीछे हटने के साथ ही उनका यह भी दावा है कि टीएमसी एक मात्र ऐसी पार्टी है जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले का राजनीतिकरण नहीं किया है. उनकी पार्टी प्रतिनिधिमंडल का बहिष्कार नहीं कर रही है.