कभी पार्टी में ‘ गद्दार’ कहलाने वाले नेता ही बढा रहे कांग्रेस का मान, ऑपरेशन सिंदूर पर बन गए पार्टी का चेहरा
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली/ हैदराबाद, 27 मई, 2025. 2019 के लोकसभा चुनावों में जब कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी की अगुवाई में लगातार दूसरी बार बीजेपी के हाथों बुरी तरह हारी और उसे लगातार दूसरी बार भी लोकसभा में विपक्ष के नेता पद मिलने लायक सीटें नहीं मिली, तो पार्टी के कुछ नेताओं ने संगठन के नीचे से ऊपर तक डेंटिंग पेंटिंग की सख्त जरूरत बताई थी . ऐसा करने वाले 23 कांग्रेसी नेता बताए गए, जो जी – 23 के नाम से चर्चित हुए. उन्होंने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी. उनकी बातों पर तो शायद ही कभी ध्यान दिया गया, लेकिन इस तरह की कथित चिट्ठी लिखने की वजह से या तो उन्हें पार्टी छोड़ने को मजबूर होना पड़ गया, या फिर कांग्रेस के अंदर ही अलग – थलग कर दिए गए. माना गया कि उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक काबिलियत को चुनौती देने की कोशिश की थी. लेकिन, आज जब देश को ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान– प्रायोजित आतंकवाद पर विपक्ष की जरूरत पड़ी है, तो कांग्रेस के यही नेता भारत की बात दुनिया के सामने रखकर पार्टी का चेहरा बनकर उभरे हैं.
कभी कहलाए ‘ गद्दार ‘ अब बन गए कांग्रेस का चेहरा
दुनिया भर के कई देशों में गए बहुदलीय भारतीय प्रतिनिधि मंडल में शामिल गुलाम नबी आजाद अब कांग्रेस में नहीं है. लेकिन, पार्टी सांसद शशि थरूर, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी और सलमान खुर्शीद जैसे नेता पार्टी के लोगों में उम्मीद की नई किरण जाग रहे हैं. ये नेता सरकार के साथ लगातार पाकिस्तान को ‘ दुष्ट देश ‘ बताने के संदेश के साथ दुनिया भर में भारत का पक्ष रख रहे हैं. कांग्रेस के इन नेताओं का रुख पार्टी के एक हिस्से से पूरी तरह से अलग है, जो लगातार केंद्र सरकार और विदेश मंत्री एस जयशंकर को इस मामले में भी विवादों में लाने की कोशिश में लगे हुए हैं.
कांग्रेस में इन नेताओं के लिए सकारात्मक माहौल
यही लोग जब 2019 में जी – 23 के नेता के तौर पर सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी की छवि सुधारने की मांग की थी, तो पार्टी के शक्तिशाली गुट ने उन पर हमला किया और उन्हें ‘ गद्दार ‘ तक कहा गया था. आज यही लोग राष्ट्रहित में कांग्रेस पार्टी की छवि को बचाने का काम कर रहे हैं. कांग्रेस के भीतर कुछ लोग मानते हैं कि जी – 23 के नेता एक अलग तरह की आवाज उठा रहे हैं. यह आवाज राहुल गांधी की कांग्रेस से अलग हो सकती है, लेकिन यह पार्टी के भीतर कई लोगों को सुकून दे रही है. कांग्रेस में एक वर्ग ऐसा है, जो आने वाले चुनावों को देखते हुए सोच रहा है कि पार्टी की छवि खराब ना हो. ऐसे में, कभी ‘ गद्दार ‘ कहे जाने वाले नेता अब पार्टी के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं . मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस की एक नेता ने कहा,’ यह विडंबना ही है कि जिन लोगों को कभी पार्टी में हाशिए पर धकेल दिया गया था, आज वही लोग पार्टी को बचाने की पूरजोर कोशिश कर रहे हैं.’
