बिहार चुनाव: आ गया एनडीए का सीट शेयरिंग फार्मूला, किस पार्टी में जा सकती है कितनी सीटें
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू 243 में से 102 — 103 और बीजेपी 101 — 102 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. बाकी बची करीब 40 सीटें लोक जनशक्ति पार्टी, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को दी जाएगी
पटना/ हैदराबाद, 7 जून, 2025. बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी है. एनडीए में सीटों के बंटवारे पर फिलहाल चर्चा चल रही है. सूत्र बताते हैं कि, पटना में शुरुआती दौर की बातचीत हो चुकी है अब जल्द ही दिल्ली में बातचीत का अगला दौर शुरू होगा. लोकसभा चुनाव के फार्मूले के मुताबिक ही एनडीए की सहयोगी दलों में टिकटों का बंटवारा होने की उम्मीद है. बता दें कि, लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 17, जेडीयू ने 16, लोजपा ने 5 एवं हम और रालोमो ने 1 –1 सीट पर चुनाव लड़ा था . बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की सभी पांच पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेगी. लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जेडीयू से एक सीट ज्यादा पर चुनाव लड़ा था. लेकिन विधानसभा चुनाव में जेडीयू बीजेपी से एक या दो ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है.
एनडीए में ये हो सकता है सीटों का फार्मूला
सूत्र बताते हैं कि, जेडीयू 243 में से 102– 103 और बीजेपी 101 — 102 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. बाकी बची करीब 40 सीटें लोजपा, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और रालोजपा को दी जाएगी. इसमें बड़ा हिस्सा लोजपा का होगा क्योंकि उसके पांच सांसद हैं. इस लिहाज से उसे करीब 25 से 28 सीटें मिल सकती है. जबकि हमको 6 से 7 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 से 5 सीटें दी जा सकती है.
जमीनी हकीकत का रखा जा रहा ध्यान
सूत्रों के हवाले से खबर है कि सहयोगी दलों में इस बात पर सहमति बन गई है कि टिकट बंटवारे में जमीनी हकीकत का ध्यान रखा जाएगा. उम्मीदवार तय करते समय दूसरे सहयोगी दलों के उम्मीदवारों की जातीय पृष्ठभूमि का भी ध्यान रखा जाएगा . जातीय समीकरणों को साधते हुए टिकट दिए जाएंगे एवं टिकट बंटवारे के समय यह ध्यान रखा जाएगा कि अगर एक जिले में अलग-अलग सहयोगी दलों को टिकट मिलता है तो ऐसा ना हो कि एक ही जाति के कई उम्मीदवार एनडीए से उतार दिए जाएं.: बल्कि कोशिश यह रहेगी कि अलग-अलग जाति के उम्मीदवार हो, ताकि सबके वोट मिल सके.
नीतीश कुमार ही होंगे एनडीए का चेहरा ?
भाजपा सूत्रों ने यह स्पष्ट किया है कि बिहार में नीतीश कुमार ही एनडीए का चेहरा रहेंगे. पीएम मोदी और नीतीश कुमार के नाम और काम पर चुनाव लड़ा जाएगा. वहीं, नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर चल रही खबरों पर बीजेपी का कहना है कि इसे मुद्दा बनाना आरजेडी को भारी पड़ेगा. नीतीश कुमार की साख और लोकप्रियता निर्विवाद है और एनडीए को निश्चित रूप से इसका फायदा मिलेगा.
बिहार में नीतीश ही बड़े भाई
बीजेपी और जेडीयू ने कई विधानसभा चुनाव मिलकर लड़े हैं, इनमें जेडीयू ने हमेशा बीजेपी से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा. 2010 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 141 और बीजेपी ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था .
2015 में नीतीश एनडीए से अलग हो गए थे. राजद और जेडीयू दोनों बराबरी यानी 101– 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था . उस चुनाव में जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी एनडीए के साथ रहे.: सहनी की वीआईपी को 11 और हम को 7 सीटें दी गई थी.: पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होकर 134 सीटों पर चुनाव लड़ा था, सिर्फ एक सीट ही जीत पाए थे. हालांकि, जदयू को लगता है कि चिराग पासवान के कारण उसे कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे नंबर पर खिसक गई . इस बार चिराग पासवान की पार्टी कह रही है कि केंद्र में कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद चिराग पासवान विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और वह भी सामान्य सीट से. इस पर भाजपा नेताओं का कहना है कि चिराग पासवान की पार्टी को जितनी सीटें मिलेगी उनमें से वह किस कहां से खड़ा करना चाहती हैं, वह तय कर सकती है. लेकिन जहां तक मुख्यमंत्री का सवाल है, नीतीश कुमार ही एनडीए का चेहरा है .