
हवा की उलटी दिशा में लहराती है जगन्नाथ मंदिर की पताका, रहस्य से जुड़ी है पौराणिक कथा

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
जगन्नाथ पुरी मंदिर 27 जून को विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के लिए तैयार है. मंदिर कई रहस्स्यों से भी भारत है जिनमे से एक शिखर पर लगी पताका का हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराना है. ध्वज को रोज बदला जाता अन्यथा 18 साल के लिए मंदिर बंद हो जाएगा.
पुरी / हैदराबाद, 14 जून, 2025. ओड़िशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर में 27 जून को असर शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा निकाली जाएगी. इस मौके पर पुरी के जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कुछ रहस्य के बारे में जानिए. यह रहस्य इस मंदिर के शिखर पर लगी पताका का है, जो हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराती है . इतना ही नहीं, इस ध्वज को रोज बदला भी जाता है. कहते हैं कि अगर शिखर का ध्वज एक दिन भी ना बदला गया, तो मंदिर 18 साल के लिए बंद हो जाएगा . यह परंपरा भगवान जगन्नाथ के प्रति सम्मान और भक्ति को दर्शाती है. मान्यता है कि पुराना ध्वज नकारात्मक ऊर्जा को खींच लेता है, इसलिए इसे रोजाना बदला जाता है. इसके अलावा इस मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र लगा है. इस चक्र को आप जिस भी दिशा से देखेंगे, वह उसी दिशा में मुड़ा हुआ दिखाई देगा. यहां समुद्र की लहरों की आवाज मंदिर परिसर तक तो सुनाई देती है, लेकिन मंदिर परिसर के अंदर जाने के बाद समुद्र के लहरों की आवाज सुनाई देना बंद हो जाती है. इन सारे रहस्यों को जानकर, सुनकर हर कोई हैरान हो जाता है. इसका पौराणिक कारण है और इन रहस्यों का संबंध हनुमान जी से जुड़ा हुआ बताया जाता है. एक पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान विष्णु समुद्र की आवाज के कारण सो नहीं पा रहे थे. जब यह बात हनुमान जी को पता चली, तो उन्होंने समुद्र देव से विनती की कि वह अपनी आवाज को रोक दें. इस पर समुद्र ने असमर्थता जताते हुए कहा कि यह मेरे बस में नहीं है. जहां तक हवा जाएगी, वहां तक मेरी लहरों की आवाज भी पहुंचेगी. तब हनुमान जी ने समुद्र देव से इसका उपाय पूछा, तो उन्होंने बताया कि आप अपने पिता पवन देव का आवाहन करें और उनसे कहे कि वह मंदिर की दिशा में न बहें.
पवन देव ने बताया था उपाय
इस पर हनुमान जी ने पवन देव का आह्वान किया और उनको यह व्यथा बताई. पवन देव ने भी कहा कि यह मेरे लिए संभव नहीं है. हालांकि, यदि तुम चाहो तो एक उपाय कर सकते हो. तुम मंदिर के चारों ओर इतनी तेजी से चक्कर लगाओ की वायु का ऐसा चक्र बन, जाए जो सामान्य पवन को मंदिर के अंदर प्रवेश न करने दे . इस उपाय को सुनते ही हनुमान जी ने वायु से भी तेज गति से मंदिर के चारों ओर चक्कर लगाने लगे. इसके बाद वायु का ऐसा चक्र मंदिर के चारों ओर बन गया, जिस समुद्र की लहरों की आवाज मंदिर के अंदर जाना बंद हो गई. इसके बाद श्री भगवान जगन्नाथ आराम से सोने लगे. कहते हैं, इस उपाय को करने के बाद में सामान्य रूप से जिस भी दिशा में हवा चल रही होती है, उसकी विपरीत दिशा में ही मंदिर का पताका लहराता रहता है. ऐसा हनुमान जी के विपरीत दिशा में चक्कर लगाने की वजह से हुआ.
