‘ मराठी अस्मिता’ पर दो दशक बाद ठाकरे बंधु एकजुट, बीजेपी के हिंदी थोपने के खिलाफ साझा मोर्चा
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी के विरोध में मिलकर मार्च निकलेंगे उद्धव और राज ठाकरे, बढ़ेगा घमासान, दो दशक बाद ठाकरे बंधु एकजुट.
मुंबई/ हैदराबाद, 27 जून, 2025. दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में राज ठाकरे ने अपनी रैली की तारीख 6 जुलाई तय की थी, लेकिन बाद में यह तारीख बदलकर 5 जुलाई कर दी गई. बताया जा रहा है कि यह बदलाव उद्धव ठाकरे के सुझाव पर हुआ है, जो दोनों के बीच समन्वय का संकेत देता है. करीब 20 वर्षों से राजनीतिक राहें अलग-अलग चल रहे ठाकरे परिवार के दो चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे अब एक ही मंच पर नजर आने वाले हैं. वजह है महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी भाषा के थोपे जाने का कथित प्रयास. राज्य में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ तीन — भाषा फार्मूले के तहत हिंदी को प्राथमिक शिक्षा में लागू किए जाने की योजना से विरोध की लहर उठ खड़ी हुई है. इसी विरोध में मराठी अस्मिता के नाम पर ठाकरे बंधुओं को फिर से करीब ला दिया है. शिवसेना( उद्धव गुट ) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी मनसे के नेता एक ही मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं. मनसे प्रमुख राज ठाकरे 5 जुलाई को रैली निकालेंगे, जबकि उद्धव ठाकरे की अगुवाई में 7 जुलाई को मराठी समन्वय समिति द्वारा बड़ा मार्च आयोजित किया जाएगा.
राज ठाकरे की अपील बिना राजनीतिक झंडे के शामिल हों
राज ठाकरे ने लोगों से अपील की है कि वे इस रैली में बिना किसी राजनीतिक झंडे के शामिल हों और केवल मराठी पहचान को प्रमुखता दें. इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि वे राजनीतिक एजेंडा छोड़कर सांस्कृतिक मुद्दों पर साझा आधार तलाश रहे हैं. राज ठाकरे ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी पार्टी उद्धव गुटके संपर्क में हैं, जिससे दोनों गुटों के संभावित पुनर्मिलन की अटकलें तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि पर्दे के पीछे बातचीत भी जारी है. महाराष्ट्र के एक बड़े नेता ने उद्धव ठाकरे के खेमे और राज ठाकरे के बीच समन्वय की पुष्टि की है, हालांकि, नेता का नाम उजागर नहीं किया गया है. शिवसेना नेता संजय राउत ने एक्स पर जानकारी दी है कि दोनों मराठी नेता हिंदी थोपने के खिलाफ एक साझा रणनीति पर काम कर रहे हैं. यह घटनाक्रम सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि दो कट्ठर प्रतिद्वंद्वियों के संभावित मेल का संकेत भी है. अब सवाल यह है कि क्या यह अस्थाई साझेदारी है या ठाकरे बंधुओं के बीच नई राजनीतिक समझदारी की शुरुआत ?