क्या अटकेगा बिहार मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण? तेजस्वी ने उठाए सवाल
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची को लेकर उठा सियासी तूफान अभी शांत नहीं हुआ था कि बिहार में भी ऐसे ही माहौल की तैयारी शुरू हो गई है. राजद नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तक यादव ने मतदाता सूची की पुनरीक्षण प्रक्रिया को सरकार की साजिश बताया है. हालांकि, चुनाव आयोग पहले ही तमाम राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है. ऐसे में आइए बिहार के मामले को विस्तार से समझते हैं.

नई दिल्ली/ पटना/ हैदराबाद, 28 जून, 2025. बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर मध्य से नवंबर के पहले हफ्ते के बीच हो सकते हैं. अब तक की तैयारी इसी ओर इशारा कर रही है. चुनाव के पहले कहीं भी मतदाता सूची का पुनरीक्षण और पुनः प्रकाशन होता है. इसी क्रम में बिहार में भी चुनाव आयोग मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करा रहा है. शुक्रवार को बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और आगामी चुनाव में महागठबंधन के संभावित सीएम फेस तेजस्वी यादव ने बिहार चुनाव से पहले मतदाताओं के गहन पुनरीक्षण को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन( एनडीए) की साजिश बताया. तेजस्वी यादव ने कई तरह के आरोप लगाए, कई गंभीर सवाल भी पूछे. इस बीच ‘ उपलब्ध दस्तावेजों,कागजातों और जमीन पर काम कर रहे अधिकारियों के पहुंचकर जो तहकीकात की गई और जानने की कोशिश की गई एवं पूरी प्रक्रिया को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं और चुनाव आयोग द्वारा इस पूरी प्रक्रिया को लेकर कैसी तैयारी है…
क्या बिहार की सभी पुरानी मतदाता सूचियों को रद्द कर दिया जा रहा है ?
विशेष गहन पुनरीक्षण इससे पहले वर्ष 2003 में हुआ था. उसे समय जो मतदाता सूची प्रकाशित की गई, उसे पूर्ण मान्यता मिली हुई है. इसके बाद के सभी पुनरीक्षण और प्रशासन के जो भी रिकॉर्ड हैं, उन्हें वेरीफाई किया जाना है. यानी 2003 की उसे मतदाता सूची के बाद जो भी नए वोटर जुड़े या हटे हैं, उनका सत्यापन किया जाएगा. बगैर सत्यापन उन्हें वोटर नहीं माना जाएगा.
भले पहले से नाम हो, लेकिन नई सूची के लिए नए सिरे से आवेदन देना होगा ?
हां, लेकिन 2003 की गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची में नाम होगा तो कोई कागज संलग्न नहीं करना होगा. केवल गणना फॉर्म भरकर उसी से सत्यापन हो जाएगा. उसके बाद जो भी लोग मतदाता सूची में जुड़े हैं, उनसे नागरिकता साबित करने वाला अलग-अलग प्रमाण पत्र मांगा गया है.+ क्या नया वोटर आईडी कार्ड मिलेगा?+
हां, नए प्रारूप में जानकारी ली जा रही है और सारा रिकॉर्ड एक लंबे अरसे के लिए रहेगा, इसलिए नया वोटर आईडी कार्ड भी बाद में जारी किया जाएगा.
चुनाव से 2 महीने पहले यह विशेष पुनरीक्षण जैसी बड़ी एक्सरसाइज क्यों ?
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ बिहार में भी अवैध-बांग्लादेशियों के रहने के दावे किए जा रहे हैं. इसके अलावा यह भी संदेह जताया जा रहा है कि कुछ पाकिस्तानी मूल के लोग भी अवैध तरीके से बिहार में रह रहे हैं. ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के जरिए मतदान प्रक्रिया में अवैध घुसपैठियों के हिस्सा लेने की आशंका बढ़ गई है. इसी दागों को ध्यान में रखते हुए चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष कराने के उद्देश्य से पुनरीक्षण कराया जा रहा है. हालांकि, यह प्रक्रिया लोकसभा चुनाव के वक्त क्यों नहीं कराई गई, इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.
गिनती के दिनों में यह करना संभव है ?
22 साल पहले यानी 2003 में इस प्रक्रिया में 2 साल लगे थे. 1 महीने में विशेष गहन पुनरीक्षण का रिकॉर्ड जुटाकर सत्यापन करना और उसके बाद पूरे 1 महीने दावा – आपत्तियों को करना है. 22 साल पहले सब कुछ कंप्यूटराइज नहीं था. मोबाइल या टैब जैसे डाटा फीड उपकरण नहीं थे. ऑनलाइन फॉर्म भरने या एक व्यक्ति के डाटा को लेकर फॉर्म प्रिंट करने का विकल्प सुलभ नहीं था. इसके अलावा तकनीक – सक्षम मानव संसाधन भी नहीं थे. इसलिए अब यह सवाल इच्छा शक्ति और समर्पण पर ही निर्भर करता है.
1 महीने के अंदर लोग नागरिकता कैसे साबित करेंगे, दस्तावेज कहां से लाएंगे ?
तेजस्वी यादव की मानें तो 9 करोड़ योग्य मतदाताओं में से 4% लोग 39 से 40 आयु के हैं. ऐसे ही 20 से 38 साल के 85% लोग यानी करीब 4 करोड़ से अधिक को अपने पिता या माता ही नागरिकता का प्रमाण देना होगा. 18 से 20 वर्ष के 11% लोग यानी 50 लाख से अधिक को माता और पिता, दोनों की नागरिकता के दस्तावेज देने होंगे. ऐसे मामले में जो लोग सही है, उन्हें खुद को सही साबित करने में ना पहले परेशानी थी और ना आगे होगी. 11 प्रमाण पत्रों में से कोई भी नहीं हो, तो भी दावा – आपत्ति के जरिए नागरिकता सिद्ध करने का विकल्प है.
मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण मांगने पर बिफरा महागठबंधन, तेजस्वी ने खोला मोर्चा
बिहार में विपक्षी दलों के महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा बताई जा रहे
तेजस्वी यादव ने भारतीय निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. तेजस्वी यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग साजिश के तहत बिहार चुनाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिसाब से मतदाताओं की छंटनी करना चाहता है. इसी कारण आयोग ने बिहार चुनाव में युवा मतदाताओं से उनके पिता– माता की नागरिकता का प्रमाण मांग रहा है. तेजस्वी ने बताया कि राज्य सरकार और केंद्र के आंकड़ों के आधार पर बिहार में मैट्रिक करने वाले कितने कम हैं और जन्म प्रमाण पत्र वाले कितने कम लोग हैं. उन्होंने बाढ़ में भी ऐसे नागरिकता प्रमाण पत्र वह जाने की बात कहते हुए आरोप लगाया कि आयोग संघ और बीजेपी के हिसाब से काम करते हुए दलित, पिछड़ों और अति पिछड़ों का मताधिकार छीनने के लिए नागरिकता का प्रमाण पत्र मांग रहा है. तेजस्वी यादव ने कहा, आज लोकतंत्र और संविधान के साथ खिलवाड़ हो रहा है.