कर्नाटक में नहीं बदलेगा सीएम

कर्नाटक में मुख्यमंत्री के पद को लेकर मची सियासी घमासान के बीच कांग्रेस के एआईसीसी प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने बड़ा ऐलान किया है. बेंगलुरु में पार्टी विधायकों के साथ वन टू वन मीटिंग करने के बाद सुरजेवाला ने डीके शिवकुमार के प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें सुरजेवाला ने तमाम अटकलें पर विराम लगा दिया.

बेंगलुरु/ हैदराबाद, 1 जुलाई, 2025. कांग्रेस कर्नाटक में पार्टी के एआईसीसी रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार को इसका ऐलान किया . कर्नाटक में मंत्रियों और विधायकों की बयानबाजी के बाद सुरजेवाला सोमवार को बेंगलुरु पहुंचे थे. इसके बाद उन्होंने वहां पर पार्टी के विधायकों से वन टू वन मीटिंग की थी. विधायकों से मिलने के बाद सुरजेवाला ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बगल में बैठाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस मुख्यमंत्री को नहीं बदलेगी. गौरतलब है कि एक दिन पहले मैसुरू में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने डीके शिवाकुमार का हाथ ऊपर करके एकता का प्रदर्शन किया था. उन्होंने कहा था कि सरकार पूरे 5 साल चलेगी. एक चट्टान की तरह. सिद्धारमैया इससे पहले भी बतौर मुख्यमंत्री 5 साल का कार्यकाल पूरा करके कीर्तिमान बना चुके हैं.

सुरजेवाला ने अटकलें पर लगाया विराम

रणदीप सुरजेवाला ने ऐलान ऐसे वक्त पर किया है जब कर्नाटक में लंबे समय से ढाई साल पूरे होने पर सिद्धारमैया के हटने की अटकलें लग रही थी. सुरजेवाला ने कहा कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा. उन्होंने यह पूछे जाने पर कि वह बेंगलुरु आए और विधायकों से मिले, इसका क्यों जरूरत पड़ी. इस पर सुरजेवाला ने कहा कि यह पार्टी के संगठन की कवायद है. उसी के तहत मै आया था. अगर आप पूछेंगे कोई नेतृत्व परिवर्तन होगा, तो इसका उत्तर है नो. सुरजेवाला ने जब नेतृत्व परिवर्तन की संभावना से इनकार किया तो उस वक्त पर उनके साथ डिप्टी सीएम डीके शिवाकुमार साथ बैठे थे. सुरजेवाला ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी में लोकतंत्र है. एक परिवार है. सभी को बोलने की आजादी है. इसी के तहत लोगों ने अपनी बात रखी थी.

कर्नाटक में मजबूत है सरकार

रणदीप सुरजेवाला के बेंगलुरु पहुंचने पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि बेंगलुरु में फैसला नहीं करेगा, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला पार्टी का आलाकमान करेगा. कर्नाटक में कांग्रेस के पास प्रचंड बहुमत है. 224 सदस्यों वाली विधानसभा में उसके 138 विधायक हैं. इसके अलावा कुछ और विधायकों का समर्थन हासिल है. ऐसे में सिद्धारमैया सरकार को 142 विधायकों का समर्थन हासिल है. बीजेपी के विधायकों की संख्या सिर्फ 81 है. विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 113 विधायकों का है.