9 जुलाई को बिहार बंद का ऐलान

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट

इंडिया ब्लॉक चल रहे संक्षिप्त मतदाता सूची संशोधन के खिलाफ है. उसने 9 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान क्या है.

नई दिल्ली/ पटना/ हैदराबाद, 7 जुलाई, 2025. चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी तरह के पहले विरोध प्रदर्शन में इंडिया ब्लॉक 9 जुलाई( बुधवार) को बिहार बंद का आह्वान किया है. साथ ही चल रहे संक्षिप्त मतदाता सूची संशोधन का विरोध करने के लिए विपक्षी दलों का गठबंधन एक साथ भी आ गया है. इंडिया ब्लॉक चल रहे संक्षिप्त मतदाता सूची संशोधन के खिलाफ है और उसका कहना है कि इससे पूर्वी राज्य के कल 8 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 20% वंचित हो जाएंगे और इसका असर ज्यादातर गरीब और पिछड़े लोगों पर पड़ेगा. बता दें कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने हाल ही में चुनाव आयोग से इस विवादास्पद प्रक्रिया को रोकने का आग्रह किया था, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर उसने 9 जुलाई ( बुधवार) को बिहार बंद का फैसला किया. इंडिया ब्लॉक के नेताओं का मानना है कि विवादास्पद मतदाता सूची संशोधन बीजेपी के इशारे पर हो रहा है और विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन शायद चुनाव आयोग को अपने कदम पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा.


‘ हम बंद का पूरा समर्थन करते हैं’

बिहार से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पत्रकारों से कहा,’ यह वास्तव में पहली बार है जब पूरा विपक्ष किसी चुनाव से पहले चुनाव आयोग के विवादास्पद कदम का विरोध करने के लिए एक साथ आया है. लेकिन हमें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि आम लोग पीड़ित हैं. इस लड़ाई में इंडिया ब्लॉक एक साथ है . हम बंद का पूरा समर्थन करते हैं और गरीबों और हाशिये के समूहों के कल्याण के लिए काम करने वाले सामाजिक संगठनों से इस विरोध का समर्थन करने का आग्रह करते हैं. ‘

गरीब मतदाताओं को बाहर करने की साजिश

वहीं, आरजेडी सांसद मनोज झा ने पत्रकारों से कहा, ” मैंने पहले भी कहा है कि यह गरीब मतदाताओं को बाहर करने की साजिश है. 22 साल बाद ऐसी प्रेक्टिस क्यों की जा रही है. क्या चुनाव आयोग ने इस अभ्यास के लिए कर्मचारियों को ट्रेंड किया है और अगर कुछ गलत हो गया तो क्या होगा? लोगों के पास इस उद्देश्य के लिए सूचीबद्ध 11 दस्तावेज नहीं है. इसके अलावा वे बाढ़ से भी जूझ रहे हैं. ऐसे में उन्हें दस्तावेज कैसे मिलेंगे. “

बंद का निश्चित रूप से असर हों

उन्होंने कहा, ” राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के महत्वपूर्ण सहयोगियों के अलावा, लाखों नागरिक गहन मतदाता सूची संशोधन के पीछे की वास्तविक सच्चाई को समझ चुके हैं. किसी भी अस्थाई रूप से शक्तिशाली नेता द्वारा घोषित सत्य अंतिम सत्य नहीं है. ” इस दौरान सीपीआईएमएल नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, ” हमने मतदाता सूची संशोधन को तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर पहले ही राज्यव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है. हमारा आंदोलन पूरे जुलाई महीने तक जारी रहेगा. बंद का निश्चित रूप से असर होगा. ” उन्होंने कहा, ” जब बिहार में लोगों के लिए सरकार बदलने और नई सरकार चुनने का समय आ गया था, तो एसआईआर ने एक बेतुकी पात्रता परीक्षा के माध्यम से मतदाताओं को चयन करना शुरू कर दिया. यह वोट बंदी है और बिहार इसकी अनुमति नहीं देगा. “

चुनाव आयोग पर होगा असर

बिहार से कांग्रेस के एक अन्य सांसद मनोज कुमार ने उम्मीद जताई कि राज्य बंद का चुनाव आयोग पर असर होगा. वही बिहार कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने कहा कि इंडिया ब्लॉक पहले से ही एकजुट था, लेकिन विवादास्पद मतदाता सूची संशोधन ने पूरे विपक्ष को और अधिक मजबूत और आक्रामक बना दिया है. हमने इस मुद्दे को लोगों तक ले जाने का फैसला किया है.

तेजस्वी यादव ने किया ऐलान

बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा,’ हमने विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, जो कमजोर वर्गों को उनके मताधिकार से वंचित करने की साजिश है . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह डर सता रहा है कि एनडीए आगामी विधानसभा चुनाव हार सकता है.’