आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में परिसीमन नहीं

नई दिल्ली से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विधानसभा क्षेत्रों के शीघ्र परिसीमन की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है . याचिका में केंद्र सरकार को आंध्र प्रदेश में पुनर्गठन अधिनियम की धारा 26 को लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई थी.

नई दिल्ली/ हैदराबाद/ अमरावती/ 25 जुलाई, 2025. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विधानसभा सीटों के परिसीमन की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दी . शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 170 (3) के तहत 2026 के बाद की जनगणना तक परिसीमन की अनुमति नहीं है . न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 26 परिसीमन से संबंधित संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 170 के अधीन है. जिसके मुताबिक, परिसीमन 2026 की जनगणना के बाद ही किया जा सकता है. न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 170 (3) परिसीमन की याचिका पर विचार करने में एक संवैधानिक बाधा है. ऐसी याचिका को स्वीकार करने से अन्य राज्यों के लिए मुकदमे बाजी के दरवाजे खुल जाएंगे. कोर्ट ने जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के संदर्भ में भेदभाव के तर्क को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राज्यों में परिसीमन से संबंधित प्रावधान केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में अलग है. कोर्ट ने माना कि जम्मू कश्मीर के लिए जारी परिसीमन अधिसूचना से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को बाहर रखना ना तो मनमाना है और न ही भेदभावपूर्ण. न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, संविधान में केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों के बीच संवैधानिक भेद है. जम्मू कश्मीर को एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुनर्गठित किया गया है. वह संविधान के भाग 7 के अध्याय 3 के प्रावधानों द्वारा शासित नहीं होता है. केंद्र शासित प्रदेश संसद द्वारा बनाए गए कानूनों द्वारा शासित होते हैं. इस तर्क में कोई दम नहीं है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को बाहर रखना मनमाना है .

याचिका में की गई थी मांग
बता दें कि, प्रो. के. पुरुषोत्तम रेड्डी द्वारा दायर की गई रिट याचिका में केंद्र सरकार को आंध्र प्रदेश में पुनर्गठन अधिनियम की धारा 26 को लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई थी . याचिका में यह तर्क दिया गया कि केवल नवगठित केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर की विधानसभा और लोकसभा सीटों का परिसीमन करना, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को इससे बाहर रखना एक अनुचित वर्गीकरण उत्पन्न करता है इसलिए, यह
संवैधानिक नहीं है .