समाजवाद को मिली वैचारिक जीत, समाजवाद गीता रामराज्य के अनुरूप : दीपक मिश्र

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट

लखनऊ/ हैदराबाद, 26 जुलाई, 2025. बौद्धिक सभा के अध्यक्ष और समाजवादी चिंतक दीपक मिश्रा ने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद शब्द को हटाने का औचित्य व आवश्यकता नहीं है. सरकार द्वारा समाजवाद शब्द को न हटाने का फैसला समाजवादी विचारधारा की ऐतिहासिक जीत है . समाजवाद अमर शहीदों का रोमानी सपना है . चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 1928 में भगत सिंह सदृश क्रांतिकारियों ने हिंदुस्तान समाजवादी गणतांत्रिक सेना का गठन किया था ताकि भारत में समाजवाद सशक्त हो. नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत में समाजवाद की अमंद बायर चाहते थे. आजादी के बाद डॉ लोहिया और लोकनायक जयप्रकाश सदृश चिंतकों ने समाजवाद को लोकमानस में स्थापित किया. दीपक मिश्र ने कहा कि समाजवाद पर प्रतिघात अमर शहीदों के सपनों और भारत की आत्मा पर प्रहार है. स्वामी विवेकानंद ने कृष्ण प्रणीत गीता और राममनोहर लोहिया ने राम राज्य से समाजवाद का अर्क निकाला था. समाजवाद को दलीय राजनीति से जोड़ना संकुचित मानसिकता और अज्ञानता है, यह भारत की वैचारिक व सांस्कृतिक विरासत है. संविधानिक व संसदीय अध्ययन संस्थान के सदस्य दीपक मिश्र ने कहा कि इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में भी काफी बहस हो चुकी है और
फैसला समाजवाद के पक्ष में आ चुका है, यदि समाजवाद को प्रस्तावना में जोड़ना भारतीय संस्कृति के अनुरूप न होता तो 1977 में आई जनता सरकार इस निर्णय को बदल देती, लेकिन उस सरकार ने संविधान की संशोधित प्रस्तावना को यथावत रखा. मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, लोकबंधु राजनारायण के साथ अटल और आडवाणी भी उस सरकार में मंत्री थे. दीपक मिश्र ने कहा कि समाजवादी आर्थिक नीतियों से विचलित होने के कारण ही एकांगी विकास हो रहा जिससे आर्थिक विषमता और सामाजिक असंतोष घट नहीं रही. चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला हमारा देश अरबपतियों के हिसाब से भले तीसरे स्थान पर है किंतु प्रति व्यक्ति की आय की दृष्टिकोण से 139 देश से पीछे है. यह विरोधाभास उचित नहीं. गौरतलब है कि राज्यसभा में सरकार ने स्वीकारा है कि समाजवाद को प्रस्तावना से हटाने की योजना नहीं है. बता दें कि, समाजवादी चिंतक तथा लोहिया समाजवाद के प्रवर्तक दीपक मिश्र’ समाजवाद’ के लिए कई बार सत्याग्रह कर चुके हैं और घोषणा कर रखी है कि यदि ” समाजवाद” शब्द संविधान की प्रस्तावना से हटाया गया तो आमरण अनशन तक करेंगे.