14 मुस्लिम जातियों को पिछड़ा वर्ग आरक्षण का फायदा देगी कांग्रेस सरकार

हैदराबाद, 31 जुलाई, 2025. तेलंगाना की कांग्रेस सरकार राज्य में मुस्लिम समुदाय की 14 पिछड़ी जातियों या समूहों को आरक्षण और अन्य सरकारी योजनाओं के फायदे देने की योजना बना रही है. इन 14 मुस्लिम समूह में शिया समुदाय के 3 लाख परिवार भी शामिल हैं . तेलंगाना में आने वाले दिनों में इस रिपोर्ट को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद देखने को मिल सकता है क्योंकि बीजेपी लगातार कांग्रेस शासित राज्यों में हिंदुओं का आरक्षण छीनकर मुसलमानों को देने का आरोप लगाती रही है.

क्या है यह पूरा मामला ?
सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमानों की इन 14 जातियों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में एक अलग कैटेगरी बीसी ( ई ) के तहत 4% का आरक्षण दिया गया था लेकिन इन्हें आरक्षण का फायदा नहीं मिल पाया. इसके अलावा यह मामला कानूनी पचडों में फंस गया, जब इसे लेकर आरोप लगने लगे की यह धर्म के आधार पर दिया गया है. तेलंगाना सरकार के सूत्रों के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय के लिए चार प्रतिशत आरक्षण को सही ढंग से लागू नहीं किया जा सका.

सर्वे से क्या पता चला ?
रेवंत रेड्डी सरकार ने सर्वे करवाया. इस साल फरवरी में सर्वे की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया. सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि तेलंगाना में मुस्लिम की कुल आबादी 12. 58% है. इसमें 10.8% पिछड़ी जाति के मुसलमान और 2.5% अन्य जातियों के मुसलमान हैं . 2011 की जनगणना के मुताबिक, राज्य में मुस्लिम समुदाय की आबादी 12.69% थी. सर्वे रिपोर्ट कहती है कि राज्य में बीसी की आबादी 56.33%है. और इसमें मुस्लिम जातियां भी शामिल है. सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तेलंगाना की विधानसभा में इस साल मार्च में दो विधेयक पास किए गए. इसके तहत सरकारी नौकरियों, शैक्षणिक संस्थाओं और शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकाय के चुनाव में पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण को 27 प्रतिशत से बढाकर 42% किया गया. इन दोनों विधेयकों को राज्यपाल के पास भेजा गया, जहां से इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास फॉरवर्ड कर दिया गया.

सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं 10.08% मुसलमान

तेलंगाना सरकार के एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक कल्याण मामलों के सलाहकार मोहम्मद अली शब्बीर ने मीडिया को बताया कि राज्य की लगभग 12.58% मुस्लिम आबादी में से 2.5% गरीबी रेखा से ऊपर हैं और उन्हें ” अमीर” माना जा सकता है. बाकी 10.08% मुसलमान सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं.

शब्बीर अली ने कहा कि रिपोर्ट में उन तीन लाख शिया परिवारों के बारे में बताया गया है जिनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि सैय्यद, मुगल, पठान, अरब, कोज्जा मेमन, आगा खानी और बोहरा जैसे मुस्लिम समुदायों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है और बीजेपी बेवजह मुद्दा बना रही है कि धर्म के आधार पर आरक्षण प्रस्तावित है. शब्बीर ने कहा कि इन मुस्लिम जातियों को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर सरकारी मदद की जरूरत है.
शब्बीर ने पत्रकारों से कहा, ” जब भी मुस्लिम आरक्षण की बात होती है, कोर्ट या सरकार की ओर से आंकड़े मांगे जाते हैं. अब हमारे पास आंकड़े हैं, हर मुस्लिम समूह की जनसंख्या और अन्य जानकारी भी है.