झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन हो गया है. उन्होंने कई सालों तक झारखंड को अलग राज्य बनाने की लड़ाई लड़ी. शिबू सोरेन 5 रुपए से शुरू कर झारखंड की तकदीर बदली. उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और आदिवासियों की हक की लड़ाई लड़ी

नई दिल्ली/ रांची/ हैदराबाद, 4 अगस्त, 2025. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन का 81 साल की उम्र में निधन हो गया. उनका इलाज दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में चल रहा था. शिबू सोरेन, जिन्हें प्यार से ‘ दिशोम गुरु ‘ कहा जाता है, ने अपने जीवन की शुरुआत महज पांच रुपए से की थी. वे अपने घर से सिर्फ 5 रुपए लेकर निकले और अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की. उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और नई झारखंड की कहानी गढ़ी.

पिता की हत्या और जीवन का नया मोड़

शिबू सोरेन का बचपन आसान नहीं था. उनके पिता की हत्या ने उन्हें कम उम्र में ही जीवन की कठोर सच्चाइयों से रूबरू करा दिया. घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि उनके पास हजारीबाग जाने के लिए किराया तक नहीं था. उन्होंने अपने बडे भाई राजाराम से 5 रुपए मांगे. लेकिन घर में 5 रुपए तक नहीं थे. लेकिन राजाराम ने हिम्मत नहीं हारी. मां के हांडा ( चावल का भंडार ) से चावल निकाला, उसे बेचकर 5 रुपए जुटाए और यही
छोटी सी राशि शिबू के हाथ में थमाई. इन 5 रुपए ने न सिर्फ हजारीबाग का रास्ता दिखाया, बल्कि एक ऐसे सफर की नींव रखी, जिसने झारखण्ड की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया.

संघर्ष से बनाई अपनी पार्टी

हजारीबाग पहुंचने के बाद शिबू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उनके दिल में आदिवासी समुदाय के उत्थान और झारखंड की पहचान को मजबूत करने का जुनून था. इन्हीं सपनों को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा ( झामुमो ) की स्थापना की. यह पार्टी न सिर्फ आदिवासियों के अधिकारों की आवाज बनी, बल्कि झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई . शिबू का यह सफर आसान नहीं था, विरोध, चुनौतियां और आलोचनाएं उनके रास्ते में बार-बार आई, लेकिन उनकी दृढ़ता ने हर बाधा को पार किया.

झारखंड के बदलाव का नायक

शिबू सोरेन ने न केवल राजनीति में अपनी जगह बनाई, बल्कि झारखंड के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने -बाने को भी मजबूत किया. उनके नेतृत्व में झामुमो ने आदिवासी समुदाय के हक के लिए लगातार संघर्ष किया. शिक्षा, रोजगार और जमीन के अधिकार जैसे मुद्दों पर उनकी आवाज ने लाखों लोगों को प्रेरित किया. 2000 में जब झारखंड अलग राज्य बना, तो यह शिबू सोरेन और उनके समर्थकों की मेहनत का नतीजा था. आज भी उनकी यह विरासत झारखंड की राजनीति में जीवित है.

पुलिस से बोले — चलो शिबू से मिलवाता हूं, धनकटी आंदोलन और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री का… शिबू सोरेन की पुलिस के साथ हुई इस अनोखी मुलाकात का किस्सा जानने के लिए धनकटी आंदोलन का जिक्र जरूरी हो जाता है. धनकटी आंदोलन की शुरुआत साल 1957 से शुरू होती है. तब शिबू बालक थे और वो भी मात्र 13 साल के… झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु के नाम से मशहूर शिबू सोरेन अब नहीं रहे. कई वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी बीमारी से जूझ रहे शिबू सोरेन का बीते शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. आज सोमवार सुबह बेटे और झारखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके निधन की जानकारी दी . शिबू सोरेन के जाते ही लोग उन्हें अपने-अपने तरीके से याद कर रहे हैं. इस सिलसिले में धनकटी आंदोलन से जुड़ा उनका एक किस्सा काफी चर्चित है, जब शिबू सोरेन को खोज रही पुलिस ने खुद शिबू सोरेन से उन्हीं का पता पूछ लिया था. शिबू सोरेन ने भी पुलिस से मिलवाने की बात कह दी.

आदिवासी चेतना के प्रतीक थे गुरुजी, शिबू सोरेन के निधन पर अशोक गहलोत ने दी श्रद्धांजलि

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी शिबू सोरेन के निधन पर शोक जताया और उन्हें आदिवासी चेतना का प्रतीक बताया. झारखंड की राजनीति में आदिवासी अधिकारों की बुलंद आवाज रहे और राज्य निर्माण के केंद्र में रहे शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने दिल्ली में अंतिम सांस ली . उनके निधन की जानकारी उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की . पिता के निधन की खबर के साथ ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है. विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें आदिवासी चेतना का प्रतीक बताया.

पीएम मोदी बोले- बहुत दुखी हूं

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है . उन्होंने मुख्यमंत्री और उनके पुत्र हेमंत सोरेन से भी फोन पर बात की है. इस बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री तथा राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने शिबू सोरेन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, उनसे मेरी पुरानी मित्रता थी. ” दिशोम गुरु ” को जमीन से जुड़े नेता के रूप में याद किया जाएगा. वे गरीबों और आदिवासियों को मजबूत करने के लिए समर्पित रहे .

सामाजिक न्याय के जमीनी स्तर के नेता थे शिबू सोरेन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
शिबू सोरेन के निधन के चलते झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है. वहीं, उनके निधन पर तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की गई है जबकि 2 दिन बंद रहेंगे सरकारी कार्यालय.

झारखंड की राजनीति शोक ही लहर

धनकटी आंदोलन से पहचान बनाने वाले और तीन बार प्रदेश की कमान संभालने वाले शिबू सोरेन का सोमवार को सुबह 8:15 बजे दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया. 2 दिन पहले वेंटिलेटर पर जाते समय ही उनकी हालत नाजुक थी. झारखंड की गवर्नर रह चुकी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उन्हें सामाजिक के न्याय क्षेत्र के सबसे बड़े आदिवासी नेता बताया. उन्होंने उनके जाने को अपूरणीय क्षति बताया.