छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र एक याद , मनाई गई 93 वीं जयंती

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
हैदराबाद, 5 अगस्त, 2025. प्रख्यात समाजवादी नेता, विचारक तथा वरिष्ठ सांसद रहे स्वर्गीय जनेश्वर मिश्र की 93 वीं जयंती हैदराबाद के अत्तापुर में मनाई गई. जयंती कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात समाजवादी चिंतक तथा लोहिया विचार मंच, के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्ति न्यायाधीश टी. गोपाल सिंह ने की. उन्होंने जनेश्वर मिश्र को याद करते हुए कहा कि उन्हें उनके प्रशंसक छोटे लोहिया के नाम से बुलाते थे. उनका जन्म 5 अगस्त, 1933 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था. वे कॉलेज के दिनों से ही समाजवादी आंदोलन में सक्रिय रहे और एक लोकप्रिय छात्र नेता बने. जनेश्वर मिश्र देश में अंग्रेजी हटाओ आंदोलन सहित कई आंदोलनों में समाजवादी युवजन सभा का नेतृत्व किया. 1969 में वे पहली बार फूलपुर निर्वाचन क्षेत्र से तत्कालीन केंद्रीय मंत्री केशव देव मालवीय को हराकर लोकसभा पहुंचे. हालांकि, जनेश्वर मिश्र पांच बार लोकसभा और तीन बार राज्यसभा के लिए भी चुने गए. उन्हें सभी गैर- कांग्रेसी और गैर — भाजपा सरकारों में केंद्रीय मंत्री परिषद के सदस्य होने का गौरव प्राप्त था. वे कई बार जेल गए लेकिन एक बार जब वे किसान आंदोलन के दौरान वाराणसी जेल में बंद थे, तब उनकी पत्नी का देहांत हो गया. सरकार ने उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए रिहा करने का फैसला किया. लेकिन उन्होंने यह कहकर इंकार कर दिया कि आंदोलन में गिरफ्तार उनके सभी साथी कैदियों को जब तक रहा नहीं किया जाता तब तक वह भी बाहर नहीं जाएंगे. सरकार ने उनकी बात मानी और सभी साथियों को जेल से रिहा कर दिया गया और तब जनेश्वर मिश्रा बाहर गए और अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार किया. ऐसे थे जनेश्वर मिश्र. 1978 में वे विशिष्ट लोहिया वादी बद्री विशाल पित्ती के चुनाव प्रचार में हैदराबाद आए थे और वे यहां तीन दिनों तक ठहरे और उनके साथ पूरे समय तक टी. गोपाल सिंह मौजूद रहे. एक दिन उन्होंने टी. गोपाल सिंह से कहा, वे सुबह की सैर पर जाना चाहते हैं, तब गोपाल सिंह जी ने उनसे कहा कि मैं पित्ती जी के घर से एक वाहन का इंतजाम कर दूंगा. लेकिन जनेश्वर मिश्र ने यह कहते हुए मना कर दिया की चुनाव प्रचार के कारण सभी ड्राइवर थके हुए होंगे और हमें उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए. यह सुनते ही टी. गोपाल सिंह ने उनके साथ एक ऑटो रिक्शा में चल पड़े. ऐसे थे जनेश्वर मिश्र. सैर के दौरान उन्होंने कहा वे बीते तीन दिनों से उनके साथ हैदराबाद में हैं लेकिन उन्हें मैंने इडली सांभर नहीं खिलाया. फिर मैं उन्हें एक होटल में ले गया और हमने इडली सांभर खाया. ऐसे थे जनेश्वर मिश्र. टी. गोपाल सिंह के मुताबिक, नई दिल्ली में उनके निवास सभी पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक खुला घर था. ऐसे थे जनेश्वर मिश्र . बलिया में जनता पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान, जब चंद्रशेखर जी प्रधानमंत्री थे, उन्होंने हमसे लोहिया साहित्य को लेकर बलिया आने को कहा. बद्री विशाल जी ने मुझे लोहिया साहित्य के साथ बलिया भेज दिया. उन्होंने हमें ठहरने के लिए अपना टेंट आवंटित कर दिया. अगले दिन जब हमने लोहिया साहित्य का स्टॉल लगाया तो कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली. लोग चंद्रशेखर जी की किताबें मांग रहे थे. तब जनेश्वर जी हमारे स्टॉल पर आए और लगभग 1 घंटे तक वहां बैठकर कुछ किताबें खरीदी. यह देखकर सैकड़ो पार्टी कार्यकर्ता हमारे स्टॉल पर आ गए और सभी किताबें बिक गई . ऐसे थे जनेश्वर मिश्र. टी. गोपाल सिंह कहते हैं कि आज की राजनीति में ऐसे कद और गुणों वाले राजनेता अत्यंत दुर्लभ है. आज उनके जन्मदिन पर हम उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और उनके द्वारा स्थापित आदर्श और उनके द्वारा अपनाए गए कार्यों के लिए स्वयं को पुन : समर्पित करते हैं.
समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र को हैदराबाद में दी गई श्रद्धांजलि
हैदराबाद के अत्तापुर में मंगलवार को छोटे लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र की 93 वीं जयंती के मौके पर विख्यात समाजवादी चिंतक टी. गोपाल सिंह ने जनेश्वर मिश्र को प्रख्यात लोहियावादी विचारक और समाजवाद के पुरोधा दिग्दर्शक बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवन भर समाजवादी विचारधारा को बढ़ावा देने का काम किया. गरीबों, वंचितों, शोषितों और किसान मजदूर के अधिकारों के लिए जीवन भर संघर्ष किया. आयोजित जयंती कार्यक्रम में जनेश्वर मिश्र के जीवन, कार्य शैली और समाजवादी आंदोलन में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई. जनेश्वर मिश्र की 93 वीं जयंती पर याद करते हुए हैदराबाद के वरिष्ठ पत्रकार देहाती विश्वनाथ ने उनके जीवन को सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बताया और कहा कि जनेश्वर मिश्र ने समाज मे समता और बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देने का भी काम किया. उन्हें शत-शत नमन और श्रद्धांजलि. इस दौरान हैदराबाद के कई समाजवादियों ने भी जनेश्वर मिश्र की जयंती पर उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि दी .
