हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष के मद्देनजर अभिषेक बनर्जी को दिल्ली में तैनात किया है. उधर, कल्याण बनर्जी और सुदीप बंदोपाध्याय का पत्ता काटकर नई टीम को जिम्मेदारी सौंप दी गई है — ताकि पश्चिम बंगाल चुनाव में 2021 जैसी चुनौतियों को टाला जा सके.

नई दिल्ली/ कोलकाता/ हैदराबाद, 6 अगस्त, 2025. तृणमूल कांग्रेस में ताजा बदलाव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मकसद से किए जा रहे व्यापक बंदोबस्त का ही हिस्सा है . 5 साल पहले मिले सबक से सतर्क ममता बनर्जी पहले से ही पश्चिम बंगाल की राजनीतिक किलेबंदी में जुटी हुई है – ताकि टीएमसी की सबसे बड़ी दुश्मन बीजेपी को अव्वल तो कोई चाल चलने का मौका ही ना मिले, अगर मिल भी जाए तो फटाफट स्थिति को संभाला जा सके. बंगाल की चुनावी राजनीति में कांग्रेस को पहले ही आगाह कर चुकी ममता बनर्जी के लिए टेंशन बढाने वाली सिर्फ बीजेपी या लेफ्ट पार्टियां ही नहीं हैं, पार्टी के भीतर भी ऐसे तत्व मौजूद हैं . जिनको समय रहते मैनेज करना निहायत ही जरूरी है. ममता बनर्जी का भाषा आंदोलन तो बीजेपी के खिलाफ है ही, बंगाली समुदाय को साथ बनाए रखने का भी कारगर उपाय है — लेकिन सबसे जरूरी हो गया था, टीएमसी नेताओं को काबू में रखना. महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी का सार्वजनिक झगड़ा तो चुनावी रैलियों से पहले रंगारंग कार्यक्रम पेश करने वाले कलाकारों के मनोरंजन जैसा उपाय लगता है. असली लड़ाई तो पार्टी के भीतर मची हुई थी, जो तृणमूल कांग्रेस की 12 मिनट वाली वर्चुअल मीटिंग में देखी गई है – और जिसके बाद कल्याण बनर्जी और सुदीप बंदोपाध्याय का पत्ता काट दिया गया. करीब 5 साल पहले टीएमसी का महासचिव बनाए जाने के बाद अभिषेक बनर्जी को बाद प्रमोशन मिला है. अभिषेक बनर्जी को अब सुदीप बंदोपाध्याय की जगह टीएमसी के संसदीय दल की कमान सौंप दी गई है — लेकिन, ये काम भी ममता बनर्जी की राजनीतिक रणनीति का बेहतरीन नमूना लगता है.
तृणमूल कांग्रेस में ताज बदलाव और इसका मकसद
खबर है कि जैसे ही कल्याण बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठा और काकोली घोष दस्तीदार को नई जिम्मेदारी देने की बात आई, कल्याण बनर्जी भड़क गए. कल्याण बनर्जी ने चीफ व्हीप के पद से इस्तीफा दे दिया, और सार्वजनिक रूप से खूब भडास निकाली. कल्याण बनर्जी का कहना है कि ममता दीदी ने जिन लोगों को सांसद बनाया है, उनमें से ज्यादातर लोकसभा पहुंच ही नहीं पाते . पूछ रहे हैं, मैं क्या कर सकता हूं? मेरी क्या गलती है ? लेकिन हर चीज के लिए मुझे ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है . अक्सर ही विवादों में रहने वाले कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई के पीछे महुआ मोइत्रा के साथ – साथ कीर्ति आजाद के साथ हुई सार्वजनिक बहस को भी एक वजह माना जा रहा है . कल्याण बनर्जी ने अपनी इस्तीफे के पीछे टीएमसी नेताओं के मतभेद और सांसदों के बीच समन्वय की कमी को बताया है. कल्याण बनर्जी की जगह काकोली घोष दस्तीदार को टीएमसी का नया चीफ व्हीप और शताब्दी रॉय को तत्काल प्रभाव से लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस का उप नेता बनाया गया है. जाहिर है, ये सब अभिषेक बनर्जी के मन माफिक हुआ है, और अब तो वे संसदीय दल के नेता भी बना दिए गए हैं.
दिल्ली में डेपुटेशन पर अभिषेक बनर्जी
बीच में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच मतभेद की खबरें आई थी, लेकिन अब सब ठीक बताया जा रहा है. ऐसी खबरें आरजीकर मेडिकल कॉलेज रेप और हत्याकांड के बाद कुछ दिनों तक आई थी. वैसे भी जिसे ममता बनर्जी ने राजनीतिक विरासत संभालने के लिए चुना है, उसकी नाराजगी किस हद तक मोल ली जा सकती है. वैसे भी ममता बनर्जी और मायावती की राजनीतिक स्टाइल तो काफी अलग है. ममता बनर्जी ने काफी सोच समझकर अभिषेक बनर्जी को टास्क दिया है. नई जिम्मेदारी बताती है कि अभिषेक बनर्जी को अब दिल्ली की राजनीति पर फोकस करना है और स्वाभाविक है, ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति अपने बाकी करीबी और भरोसेमंद नेताओं के सहयोग से संभालेगी. और सबसे बड़ा फायदा होगा कि अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को पसंद नहीं करने वाले नेता भी बिरोकटोक अपना काम कर सकेंगे.