सीसीटीवी कैमरे में बंद किए, 62 हार्ड डिस्क तोड़कर नदी में फेंक दी

जासूसी के इस हाई प्रोफाइल मामले की जांच कर रहे अफसरों के मुताबिक, हार्ड डिस्क को पूरी तरह नष्ट करने का आदेश उस वक्त एसआईबी के प्रमुख रहे टी. प्रभाकर राव ने दिया था.

हैदराबाद, 9 अगस्त, 2025. तेलंगाना की राजनीति में इस बात को लेकर शोर मचा हुआ है कि के. चंद्रशेखर राव ( केसीआर ) की सरकार के दौरान विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं की बड़े पैमाने पर जासूसी और निगरानी की जा रही थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में लगातार कई रिपोर्ट्स प्रकाशित हुई है. बड़ी जानकारी यह है कि 4 दिसंबर 2023 की रात, 8: 34 बजे से 9 : 34 बजे के बीच, हैदराबाद स्थित तेलंगाना की स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच( एसआईबी ) के सीसीटीवी कैमरों को बंद कर दिया गया था. इसे 1 घंटे के दौरान 62 हार्ड डिस्क को तोड़कर नदी में फेंक दिया गया. दिलचस्प बात यह है कि 3 दिसंबर, 2023 को ही तेलंगाना विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे .

बीआरएस सरकार के कार्यकाल में हुई जासूसी
मामला यह है कि भारत राष्ट्र समिति ( बीआरएस ) सरकार के कार्यकाल के दौरान ( 2014– 2023) में ( एसआईबी ) ने करीब 600 लोगों के फोन टैप किए और निगरानी की. जिन लोगों की निगरानी की गई उनमें विरोधी राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा ब्यूरोक्रेट्स, बिजनेसमैन, हाईकोर्ट के जज, उनके लाइफ पार्टनर, ड्राइवर और बचपन के दोस्त भी शामिल हैं . इसके पीछे मकसद विधानसभा चुनाव में बीआरएस को जीत दिलाना और विरोधियों पर नजर रखना था. तेलंगाना में कांग्रेस सरकार आने के बाद इस मामले की जांच हैदराबाद पुलिस कर रही है.

हैदराबाद पुलिस की जांच में क्या पता चला ?

इस हाई प्रोफाइल मामले की जांच कर रहे
अधिकारियों के मुताबिक, हार्ड डिस्क को पूरी तरह नष्ट करने का आदेश उसे वक्त के एसआईबी के प्रमुख रहे टी. प्रभाकर राव ने दिया था. यह बताना लाजिमी है कि राव ने 4 दिसंबर 2023 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसी दिन कांग्रेस ने तेलंगाना में सत्ता संभाली थी और बीआरएस की सरकार से विदाई हुई थी.+ केसीआर सरकार में निशाने पर थे रेवंत रेड्डी, करीबियों की होती थी’ निगरानी’

जांच में जुटे अधिकारियों के मुताबिक, अधिकतर डिस्क में कई नेताओं के प्रोफाइल, टेलीफोन पर की गई बातचीत और ऑनलाइन चैट थी. लेकिन कुछ डिस्क में भाकपा ( माओवादी ) से जुड़ा डेटा भी था और इसे ही एसआईबी को इकट्ठा करना था.

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय भी हुए जासूसी के शिकार
केंद्रीय राज्य मंत्री और तेलंगाना में बीजेपी के बड़े नेता बंडी संजय कुमार की भी जासूसी की गई. उन्होंने शुक्रवार को इस मामले में हैदराबाद पुलिस के सामने गवाही दी और दावा किया कि राज्य में 6 हजार 5 सौ लोगों के फोन टैप किए गए. बंडी संजय ने कहा कि उनके अलावा रेवंत रेड्डी और बीआरएस के कई विधायकों के भी फोन टैप किए गए .

क्या है ‘ आरआर मॉडल ‘? दरअसल, जांच में जुटे अधिकारियों ने बताया था कि उस दौरान एसआईबी कार्यालय में तैनात डीएसपी डी. प्रणीत राव और उनकी टीम ने रेवंत रेड्डी के परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, करीबी लोगों और पार्टी से जुड़े दर्जनों लोगों का प्रोफाइल तैयार किया था और इसे ‘ आरआर मॉडल’ का नाम दिया गया था.
अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों ने हार्ड डिस्क को नष्ट किया उसमें एसआईबी द्वारा दशकों से इकट्ठा किया गया बेहद जरूरी डेटा भी था. डेटा खत्म होने से आंतरिक सुरक्षा को भारी नुकसान पहुंचा है. इनमें से 36 डिस्क विशेष ऑपरेशंस टीम ( एसओटी ) के पास थी. एसओटी एसआईबी के निर्देश पर काम करती थी.

एसओटी के प्रमुख थे डी. प्रणीत राव

एसओटी के प्रमुख डी. प्रणीत राव थे जो एसआईबी में डिप्टी एसपी थे. उन्हें इस केस में गिरफ्तार किया गया था लेकिन फिलहाल वह जमानत पर हैं . डी. प्रणीत राव की टीम के पास तीन कमरे थे जिनमे कुल 11 कर्मचारी थे. इस टीम के पास 17 डेस्कटॉप, 2 लैपटॉप,2 फोन नंबर और हाई स्पीड इंटरनेट था. एसओटी का काम टेलीकॉम कंपनियों को पत्र के माध्यम से कॉल इंटरसेप्ट करवाना था . एक अहम जानकारी यह भी सामने आई है कि एसओटी ने निगरानी करने के लिए हैदराबाद के एक प्राइवेट सर्विलांस ऑपरेटर की मदद भी ली थी. इस कंपनी ने एसओटी की टीम को 3 सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए थे जिनसे डेटा इकट्ठा किया जाता था.