राहुल+ तेजस्वी =?, वोटर अधिकार यात्रा से बिहार में कितना गेम बदल देंगे ‘ दो लड़के’ ?


हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा आज यानी रविवार से सासाराम जिले से शुरू हो गई है. 15 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा करीब 25 जिलों से होकर गुजरेगी.
पटना / हैदराबाद, 17 अगस्त, 2025. बिहार में आज से राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा शुरू हो गई है. बिहार में विधानसभा चुनाव के करीब दो माह पहले यह सियासी यात्रा 15 दिनों तक चलेगी और 1 सितंबर को पटना में महागठबंधन की महारैली के साथ संपन्न होगी. राहुल गांधी की यह यात्रा बिहार के 25 से ज्यादा जिलों से गुजरेगी और करीब 1300 किलोमीटर का सफर तय करेगी. वोट चोरी के दावों को लगातार धार दे रहे राहुल गांधी के साथ इस यात्रा में राजद के नेता तेजस्वी यादव मौजूद हैं. वोटर अधिकार यात्रा के जरिए राहुल गांधी बिहार में वहीं राजनीतिक प्रयोग आजमाएंगे, जिसका सफल ट्रायल उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में कर दिखाया था.
दलितों पर कांग्रेस का दांव
बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन यानी एसआईआर में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर निकल जा रही इस यात्रा के दौरान राहुल गांधी की कोशिश बिहार में गरीब तबके ( दलित – पिछड़े ) को दोबारा कांग्रेस के साथ जोड़ने की होगी. रैली से ठीक 1 दिन पहले कांग्रेस ने कहा कि दलित — वंचित के साथ पीड़ित– शोषित और अल्पसंख्यकों से वोट का अधिकार छीना जा रहा है. फिर उनकी भागीदारी छिनी जाएगी. इशारा साफ है कि राहुल गांधी की कोशिश एनडीए की ओर झुकाव रखने वाले दलितों — महादलितों और अति पिछड़ा वोट बैंक में सेंध लगाने की होगी.
सासाराम से वोटर अधिकार यात्रा की शुरुआत
राहुल गांधी वोटर अधिकार यात्रा का शंखनाद सासाराम जिले से शुरू कर रहे हैं, जो दलितों का गढ़ है. बाबू जगजीवन राम और फिर उनकी बेटी मीरा कुमार यहीं से सांसद चुनी जाती रही. मुस्लिमों की तरह दलित भी बिहार में कांग्रेस का बड़ा वोट बैंक रहा है. ऐसे में राहुल– तेजस्वी की कोशिश मुस्लिम– यादव के साथ दलित वोटों को महा गठबंधन के पाले में खींचने की है. बिहार में दुसाध — पासी वोट के साथ अन्य दलित जातियों का 55 से 65 फ़ीसदी वोट एनडीए के पाले में जाता रहा है, लेकिन 2024 के चुनाव में इसमें गिरावट देखी गई. सासाराम के बाद यह यात्रा औरंगाबाद, गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, सुपौल, दरभंगा, सीतामढ़ी, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, छपरा और आरा से गुजरेगी .
यूपी में राहुल और अखिलेश यादव की जोड़ी

आम चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में दो लड़कों ( राहुल गांधी और अखिलेश यादव) ने संविधान बदलने को लेकर ऐसा ही नॉरेटिव गढ़ा था. जहां लाल किताब लेकर राहुल ने हर रैली में बीजेपी के 400 पर के जाने और संविधान बदल देने का माहौल बनाया. इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के 20 फ़ीसदी दलित वोटों पर पड़ा, जो मायावती के हाशिये पर जाने के बाद नया सियासी जगह तलाश रहा था. नतीजा यह रहा कि सपा और कांग्रेस ने मिलकर यूपी की 43 लोकसभा सीटें जीत ली. 2019 के लोकसभा चुनाव में एक सीट जीतने वाली कांग्रेस को 6 सीटें मिली. जबकि लगातार दो चुनावों में अगले बहुमत हासिल करने वाली भाजपा 240 पर ठीठक गई और उसे नीतीश नायडू की बैसाखी का सहारा लेना पड़ा.
बिहार में वोटर अधिकार यात्रा क्या सफल होगी
सियासी गलियारों में यह सवाल लगातार कोंध रहा है कि बिहार में क्या ये दो लड़के वो कमाल कर पाएंगे, जो यूपी में ठीक 1 साल पहले दो लड़कों ( राहुल गांधी और अखिलेश यादव) ने किया था. बीजेपी के खिलाफ इन दोनों ही सियासी यात्राओं में राहुल गांधी मुख्य किरदार की भूमिका में है . बिहार की इस सियासी मुहिम में भी राहुल गांधी ने फ्रंट सीट पर कमान संभाली है . हालांकि, यूपी में जिस तरह अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी विपक्षी गठबंधन में अगुवाई कर रही थी, वही बिहार में महागठबंधन का नेतृत्व राजद के हाथों में है.
कांग्रेस की वापसी की जद्दोजहद
राजनीतिक जानकार यह यह भी कह रहे हैं कि राहुल गांधी की यह यात्रा असल में कांग्रेस को बिहार में मुख्य मुकाबले में लाने की जद्दोजहद है. विवादित ढांचा विध्वंस होने के बाद जिस तरह यूपी में मुस्लिम दलित वोट कांग्रेस से छिटककर क्षेत्रीय दलों सपा– बसपा पाले में चला गया, वही कहानी बिहार में भी दिख रही है.
