टीएमसी-सपा के बाद उद्धव गुट विपक्ष को झटका

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट

तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बाद अब शिवसेना उद्धव गुट ने भी पीएमसीएम को हटाने वाले विधेयक को लेकर गठित की जा रही जेपीसी का बहिष्कार किया है. संजय राउत ने इसे कोरी नौटंकी करार दिया है.

मुंबई/ कोलकाता/ लखनऊ/ हैदराबाद, 25 अगस्त, 2025. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की गिरफ्तारी और 30 दिनों तक जेल में रहने पर पद से बर्खास्त करने वाले विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति में भेजने के प्रस्ताव को झटका लगा है. विपक्षी पार्टियों में इस समिति को लेकर मतभेद पैदा हो गए हैं. तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बाद अब शिवसेना( उद्धव गुट ) ने भी इस समिति से किनारा कर लिया है. उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए जा रहे इस बिल को लोकतंत्र को कुचलने वाला बताया है. सोशल मीडिया एक्स पर लिखे पोस्ट में संजय राउत ने सरकार द्वारा लाए गए इस विधेयक को संसदीय समिति में भेजने के प्रस्ताव को नौटंकी करार दिया. उन्होंने लिखा, ” मोदी सरकार लोकतंत्र को और जनता द्वारा चुनी गई सरकार को कुचलने के लिए 130 वां संशोधन विधेयक लेकर आई है. विधेयक की समीक्षा में की जा रही संयुक्त संसदीय समिति केवल एक नौटंकी है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे यह स्पष्ट करते हैं कि शिवसेना ऐसी किसी भी जेपीसी में भाग नहीं लेगी. ” गौरतलब है कि इस बिल पर संयुक्त समिति में भाग लेने का विरोध सबसे पहले तृणमूल कांग्रेस ने किया था. ऐसे में यह तय माना जा रहा था कि वह इसमें भाग नहीं लेंगे. लेकिन विपक्ष को झटका तब लग गया जब अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने भी जेपीसी में अपने पसंद सांसद भेजने से इनकार कर दिया. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस विधेयक को लेकर कहा, ” इस विधेयक का विचार ही गलत है, जिसने यह विधेयक पेश किया है ( गृह मंत्री अमित शाह ) उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि उनके ऊपर फर्जी आरोप लगाए गए थे. अगर कोई भी फर्जी केस कर सकता है तो फिर इस बिल का मतलब क्या है? ” इसके अलावा टीमसी के डेरेक ओब्रायन जैसे वरिष्ठ नेता ने जेपीसी की उपयोगिता पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ” 2014 के पहले जेपीसी को जनहित और जवाब देही सुनिश्चित करने वाले एक सशक्त तंत्र के रूप में देखा जाता था. लेकिन अब इसकी भूमिका काफी हद तक खोखली हो गई है . सरकारें इसका राजनीतिक इस्तेमाल करने लगी है. ” बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में संविधान( 130 संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया था. इस विधेयक के मुताबिक, अगर कोई पीएम, सीएम और मंत्रियों जैसे पद पर बैठा व्यक्ति गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक जेल में रहते हैं, तो उन्हें स्वत : पद से हटा दिया जाएगा. बिल को पेश करने के दौरान विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया. एक सांसद ने तो बिल की कॉपी फाड़कर केंद्रीय गृह मंत्री के ऊपर तक फेंकने की कोशिश की. इसके बाद इस विधेयक को भी केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार( संशोधन विधेयक, 2025 के साथ संसदीय समिति के पास भेज दिया है. अब एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया जाएगा. इसमें कुछ 31 सांसद होंगे और समिति को शीतकालीन सत्र तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी.

जेपीसी में शामिल होने के पक्ष में कांग्रेस

समझा जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व इस समिति में शामिल होने के पक्ष में हैं क्योंकि उसे लगता है कि जेपीसी की जांच के दौरान पार्टी और व्यापक विपक्ष की आलोचना दर्ज करना जरूरी है.