संबलपुरी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने की मांग, 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के सम्मान से खिलवाड़ — दुर्गा पाढी

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ के साथ संबलपुर रिपोर्टर की खास रिपोर्ट
संबलपुर/ हैदराबाद, 23 सितंबर 2025. संबलपुर जिला कांग्रेस ने संबलपुरी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने और अनुच्छेद 8 में शामिल करने की फिर से मांग उठाई है . संबलपुर जिला कांग्रेस ने राज्य के एक मंत्री द्वारा इस संदर्भ में दिए गए बयान की करी निंदा की है. दरअसल राज्य विधानसभा मौजूदा सत्र में राज्य के संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने बयान दिया था कि राज्य सरकार के पास संबलपुरी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने और उसे अनुच्छेद 8 में शामिल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. संबलपुर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा इसका पुरजोर विरोध किया गया. जिला कांग्रेस कमेटी के संयोजक तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता दुर्गा पाढी ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर कहा कि मंत्री का बयान संबलपुरी भाषा का उपयोग करने वाले 2 करोड़ पश्चिम ओड़िशा के लोगों के सम्मान पर गंभीर आघात है. कांग्रेस नेता पाढ़ी ने कहा कि संबलपुरी भाषा केवल पश्चिमी ओड़िशा संभाग में ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और झारखंड के कई संभागों में बोली जाती है, जिसमें पश्चिमी ओड़िशा के दो करोड़ से ज्यादा लोग भी शामिल है. दूसरी ओर, बीजेपी ने केंद्र के सहयोग से अपने 2024 के चुनावी घोषणा पत्र में संबलपुरी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने और अनुच्छेद 8 में शामिल करने की घोषणा की थी. अब कांग्रेस ने सवाल किया है कि क्या मंत्री सूरज को इसकी जानकारी नहीं है? बावजूद इसके राज्य सरकार के संस्कृति मंत्री ने ऐसा बयान दिया है, तो यह अत्यंत निंदनीय है, ऐसा बीते दिनों संबलपुर जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक विशेष बैठक में जिला कांग्रेस कमेटी के संयोजक दुर्गा पाढ़ी ने कहा. गौरतलब है कि कांग्रेस नेता पाढ़ी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में संबलपुरी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने और अनुच्छेद 8 में शामिल करने की मांग पर सहमति जताई गई. इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य, वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र कुमार पुरोहित, सुरंजनी बारिक, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, वकील विनोद दाश, प्रकाश सतपथी, संबलपुर जिला महिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुतपा मित्रा, पूर्व पार्षद कृष्णा सुनार, अशोक सोनी, ओबीसी अध्यक्ष शिवब्रत प्रधान, पीएससी ( किसान प्रकोष्ठ ) महासचिव गोविंद मिश्रा, सुभाषिनी मुंडा, किसान नेता लक्ष्मी प्रधान, दशरथ दास, बिरंची महापात्र, कविता पटनायक, बाबू खान, राजेश मिश्रा, तपन बेहरा व एमडी सलीम प्रमुख मौजूद थे.