केंद्र से बातचीत नहीं होगी

लेह हिंसा के बाद प्रशासन ने इस घटना की जांच का आदेश दिया है. उधर, लेह की सर्वोच्च संस्था ने कहा कि इस जांच को ही ठुकरा दिया है.

लेह / हैदराबाद, 4 अक्टूबर, 2025. लेह में 24 सितंबर को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई फायरिंग में चार नागरिकों की मौत के मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश लद्दाख प्रशासन ने दिए हैं. इसके लिए एसडीएम नुबरा मुकुल बेनीवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. उन्हें चार हफ्तों में रिपोर्ट सौंपनी होगी. हालांकि, लेह की सर्वोच्च बॉडी ( एलएबी ) ने मजिस्ट्रेट जांच को ठुकरा दिया है और जवाबदेही तय करने के लिए न्यायिक जांच की मांग की है. एलएबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक न्यायिक जांच का आदेश नहीं दिया जाता और हिरासत में लिए गए लोगों,जिनमें सोनम वांगचुक भी शामिल हैं, को रिहा नहीं किया जाता, तब तक केंद्र से कोई बातचीत नहीं होगी. इस बीच, लेह की अदालत ने हिंसा के मामले में गिरफ्तार 26 लोगों को अंतरिम जमानत दे दी है . अगली सुनवाई आज यानी 4 अक्टूबर को है. अदालत ने कहा कि मुकदमे की कार्यवाही अभी जारी रहेगी. वहीं, कई अन्य लोग अब भी जेल में है और पुलिस कई आरोपियों की तलाश कर रही है . लेह में 10वें दिन भी मोबाइल इंटरनेट बंद है. इससे स्थानीय लोगों और कारोबारियों की दिक्कतें बढ़ गई है . पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हिंसा में शामिल कई नाम सामने आए हैं और सुरक्षा एजेंसियां आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है.

सोनम वांगचुक के गिरफ्तारी के खिलाफ पत्नी सुप्रीम कोर्ट पहुंची, पूछा– ऐसा क्या किया जो एनएसए लगाया ? !

गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सोनम वांगचुक हिरासत को चुनौती दी है और साथ ही उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है. अंगमो ने अपने पति वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एनएसए लगाने की फैसले पर भी सवाल उठाया है. सोनम बांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. ये याचिका 2 अक्टूबर की शाम को दाखिल की गई. याचिका में केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है. गीतांजलि ने सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा करने की मांग करते हुए हबेयस कार्पस याचिका दायर की है. वांगचुक फिलहाल जोधपुर जेल में बंद हैं . उन्हें 24 सितंबर को लेह में हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था. लेह हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी. गीतांजलि अंगमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए याचिका की जानकारी दी है. उन्होंने लिखा, मैं सोनम बांगचुक की नजरबंदी के खिलाफ एक प्रत्यक्षीकरण याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगी है. आज एक हफ्ता हो गया. लेकिन अभी भी मुझे सोनम की सेहत और नजरबंदी के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

गीतांजलि अंगमो ने वकील सर्वम ऋतम खरे के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में बांगचुक की हिरासत को चुनौती दी है और साथ ही उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है. अंगमो ने अपने पति वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम( एनएसए ) लगाने की फैसले पर भी सवाल उठाया है. उनका आरोप है कि अभी तक उन्हें हिरासत के आदेश की कॉपी नहीं मिली है, जो कि नियमों का उल्लंघन है.

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिख चुकी है अंगमो

गीतांजलि अंगमो ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर भी अपने पति सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई की मांग की है . उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लद्दाख के उप राज्यपाल कविंदर गुप्ता, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और लेह के जिला आयुक्त को भी इस पत्र की एक-एक कॉपी भेजी है.