चिराग ने लगा दी एनडीए में ‘ आग ‘, सीट बंटवारे से बौखलाए नीतीश… जदयू नेताओं से पूछे तीखे सवाल
हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
बिहार में एनडीए गठबंधन के भीतर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लोजपा ( आर ) प्रमुख चिराग पासवान के बीच सीटों को लेकर तकरार अब खुलकर सामने आ गई है. चिराग पासवान के कारण एनडीए गठबंधन में सहयोग की भावना खत्म होने के कगार पर है, जिससे एनडीए के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.
पटना/ हैदराबाद, 14 अक्टूबर, 2025. क्या एनडीए टूट जाएगा? अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच आमने-सामने की लड़ाई शुरू हो गई है. एनडीए में सहयोग और समन्वय की जो भावना बनी थी, वह चिराग की जिद की वजह से खत्म होने की कगार पर है. सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सख्त नाराजगी के कारण ही एनडीए की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करनी पड़ी थी. उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी भी चिराग पासवान को अधिक तवज्जो दिए जाने से नाराज हैं . लेकिन कोई खुलकर नहीं कह रहा. हालांकि, ये नेता अंदर ही अंदर भाजपा पर भड़के हुए हैं. इनका कहना है कि हम चिराग के बिना भी जीत कर सकता हासिल कर चुके हैं. फिर इतने मान — मान — मनौवल की क्या जरूरत है. घटक दलों की नाराजगी अब शेरों – शायरी से बाहर आ रही है.
नीतीश ने जदयू के वार्ताकारों से पूछा, ऐसा कैसे हुआ ?
हालांकि, नीतीश कुमार ने भाजपा या अन्य सहयोगी दलों पर कुछ नहीं कहा है. लेकिन उन्होंने अपने दल के उन नेताओं को तलब किया है, जो सीट शेयरिंग में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. उन्होंने नाराजगी के साथ पूछा कि जदयू की जीती हुई सीटें कैसे दूसरे दलों को देने की बात तय हो गई ? ऐसा कैसे हुआ? इसे ठीक कराइए, फिर बात कीजिए.
चिराग को सहयोगी दलों की सीट क्यों चाहिए ?
चिराग पासवान को 29 सीटें दिए जाने के बाद अब विवाद इस बात पर भड़क गया है कि वे जदयू की 4 सिटिंग सीटें मांग रहे हैं. बिना समन्वय बनाए इन सीटों पर उम्मीदवार भी तय कर दिए हैं. सीट बंटवारे में चिराग, भाजपा की जिम्मेदारी थे. जेडीयू इसमें कहीं नहीं था. लेकिन इसके बाद भी जदयू की सीटिंग सीटों पर हक जताना, चिराग की मनमानी के रूप में देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री जदयू के हैं. वह बड़ी पार्टी है. फिर कैसे वह अपनी जीती हुई सीटें चिराग के लिए छोड़ सकती है. जदयू का कहना है, एनडीए में रहकर, अधिक सीटें लेकर भी चिराग टकराव का रास्ता अपने हुए हैं.
सोनबरसा पर रार, क्या टूटेगा एनडीए ?
सोनबरसा विधानसभा क्षेत्र से जदयू के विधायक रत्नेश सादा नीतीश सरकार में मंत्री हैं . इसके बावजूद चिराग ने इस सीट पर दावा ठोक दिया. अब तो यहां टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कठोर रुख दिखाते हुए इस सीट पर रत्नेश सदा को सिंबल भी दे दिया है. यानी नीतीश कुमार इस सीट पर कोई समझौता नहीं कर सकते. चिराग माने या ना माने इससे उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता. दूसरी तरफ चिराग ने सोनबरसा सीट पर रीना पासवान को उतारने का संकेत दे दिया है. ऐसी स्थिति में या तो फ्रेंडली फाइट होगी या फिर एनडीए टूट जाएगा. नीतीश कुमार की अब तक जो राजनीति रही है, उसके हिसाब से वे फ्रेंडली जो मिलेगा फाइट कभी पसंद नहीं करेंगे. चिराग को ही हकीकत समझनी होगी.
राजगीर, तारापुर पर चिराग का दावा कैसे ?
इसी तरह राजगीर सुरक्षित सीट भी जदयू के कब्जे में है. कौशल किशोर यहां से विधायक हैं . इस सीट पर चिराग ने दावा ठोक कर प्रत्याशी का चयन भी कर लिया है. लोजपा ( आर ) की तरफ से परशुराम पासवान को टिकट दिए जाने की चर्चा है. तारापुर सीट को लेकर नीतीश कुमार नाराज हैं. इस सीट पर 2020 में जदयू के मेवालाल चौधरी जीते थे. उनके इस्तीफे के बाद उपचुनाव हुआ तो जदयू के राजीव कुमार सिंह ने चुनाव जीता. यह सीट 2010 से ही जदयू के कब्जे में है . ऐसी स्थिति में तारापुर सीट पर चिराग की दावेदारी से मामला बिगड़ गया है. समस्तीपुर की मोरवा सीट को भी जेडीयू अपनी परंपरागत सीट मानता है. इस सीट पर चिराग ने प्रत्याशी तय कर दिया है. घटक दलों का आरोप है कि चिराग अपने सहयोगी दलों की सीटों पर दावा ठोक कर एनडीए गठबंधन को कमजोर कर रहे हैं.