छात्राओं के बाल खींचे, बेरहमी से पीटा… जेएनयू में बवाल

जेएनयू में छात्रों और पुलिस के बीच टकराव ने फिर से माहौल गरमा दिया है. वामपंथी संगठनों ने पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया, जबकि पुलिस का कहना है कि छात्रों ने बैरिकेड तोड़े और सड़क जाम की कोशिश की

नई दिल्ली/ हैदराबाद, 19 अक्टूबर, 2025. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय( जेएनयू ) एक बार फिर विवादों में है . शनिवार शाम वामपंथी छात्र संगठनों के विरोध मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों के टकराव हो गया. मामला एबीवीपी के खिलाफ एफआईआर की मांग से शुरू हुआ और पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया.

विरोध मार्च और टकराव की शुरुआत

वामपंथी छात्र संगठन’ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स संगठन'( ए आई एस ए ) और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ‘ ( एसएफआई ) ने आरोप लगाया कि एबीवीपी की हिंसा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज न होने पर वे वसंत कुंज थाने तक मार्च कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें जेएनयू पश्चिमी गेट पर रोक दिया.

छात्रों का आरोप: पुलिस ने की बर्बरता

एआईएसए का कहना है कि जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार और कई छात्रों को पुलिस ने बेरहमी से पीटा और हिरासत में ले लिया. एआईएसए ने एक बयान में कहा, ” स्कूल जेबीएम में एबीवीपी की हिंसा के खिलाफ प्राथमिकी की मांग करते समय जेएनयूएसए अध्यक्ष और अन्य छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने बर्बरता की. ” वहीं, एसएफआई ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस दौरान छात्राओं के बाल खींचे गए और उनके साथ मारपीट हुई.

पुलिस का पक्ष : बैरिकेड तोड़े, सड़क जाम किया

पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि करीब 70 से 80 छात्र, जिनमें महिलाएं भी थी, ने पुलिस बैरिकेड तोड़े, पुलिस कर्मियों से धक्का– मुक्की की और नेल्सन मंडेला मार्ग पर ट्रैफिक रोका. हालत बिगड़ने से पहले पुलिस ने 28 छात्रों को हिरासत में ले लिया. पुलिस के मुताबिक, इस झड़प में 6 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. जबकि छात्रों का कहना है कि उनकी शांतिपूर्ण मांगों को दबाने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया.

क्यों किया गया ये प्रदर्शनी
वामपंथी संगठनों ने पहले ही पोस्टर जारी कर वसंत कुंज थाने तक मार्च का ऐलान किया था. उनका सवाल था कि एबीवीपी पर हिंसा के आरोपों के बावजूद अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है.