दीपक, दिवाली और समाजवाद एक सामयिक सोच: दीपक मिश्र

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की रिपोर्ट

लखनऊ/ हैदराबाद, 20 अक्टूबर, 2025 . दीपावली एक अंधेरे के विरुद्ध दीपक के जनयुद्ध का पर्व है, दीपक जो समाजवाद का प्रतीक और समदर्शी है. दीपक चाहे माटी का हो, सोने का हो या फिर तांबे आदि के धातु से निर्मित हो, अमीर की कोठी में स्थापित हो या गरीब की कुटिया में हो, उसकी रोशनी व मुस्कान में फर्क नहीं पड़ता.
दीपक हर जगह समदर्शिता के कारण समान ज्योति देता है, जाति, लिंग, संप्रदाय का विभेद नहीं करता.
‘ मेरे चिराग अलग हों तेरे चिराग अलग हों रोशनी दोनों में, लेकिन अलग नहीं होती’ यही मानवता का संदेश है, हम सब अलग-अलग होकर भी एक हैं, सबमें एक रोशनी या नूर है. यह तसव्वुर नहीं हकीकत है. नजर के जाविए बदले हैं और कुछ भी नहीं वही है काबे में जो नूर सोमनाथ में है. कृष्ण ने कहा है– समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठति परमेश्वरं प्रभु राम के नाम पर विभेद का कुत्सित कुराग छेड़ने वलों को तुलसीदास की इस पंक्ति से रोशनी लेकर– सियाराममय सब जग जानी करहूं प्रणाम जोर जुग पाणी अपने को विभेदकारी दुर्योधिनी दुराग्रह रूपी अंधियारे से निकालना चाहिए. यहां पानी का तात्पर्य पाणि से है जिसका मतलब हाथ होता है. सबमें जब सीता और राम का सुनिवास है, तो गैर कोई नहीं. सब अपने और अपने जैसे ही हैं. फिर अमीर या राजा होकर इतराना क्या
गरीब वा रंक होकर सर झुकाना क्या दीपावली में हम अपने घर को रोशन करने के साथ-साथ सड़क पर भी दीपक जलाते हैं जो इस भाव का प्रतीक है कि सिर्फ अपना और अपने घर की भलाई के साथ-साथ उनके भी पथ को
ज्योतिर्मय करना हमारा लोक कर्तव्य है जिन्हें हम जानते तक नहीं. समाज के हित में राष्ट्र का हित है, दोनों के हित में ही हमारा निजी हित भी निहित है, यही दीपावली की शिक्षा है. शाम को हम लोग फुटपाथों पर रहने वालों के साथ पल दिवाली के मानते रहे हैं. आज हमें मिलकर अंतस में भी व्याप्त अंधियारे को दूर करने का संकल्प लेना होगा. अंतत : दुआ करो कि सलामत रहे किरदार हमारा यह एक दीपक सौ अंधियारों पर भारी है
आज की रात क्या, आज की रात से हम संकल्प लें कि ऐसा दुनिया बनाएंगे जिसमें सिर्फ दीप जलेंगे, दिल नहीं, हम अपनी आंखों में नफरत हिकारत की जलन को भस्मीभूत कर देंगे, उसकी जगह प्रेम के दीयों की जगह देंगे. मरने के बाद स्वर्ग मिले न मिले, क्यों ना इस धारा को ही स्वर्ग बनाएं. दीपक मिश्र.