वोटिंग से पहले राहुल गांधी ने खेला जातीय कार्ड, सी को लेकर दिए बयान से खड़ा हुआ विवाद

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
राहुल गांधी ने बिहार चुनाव प्रचार के दौरान जातीय प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए हैं. इस दौरान उन्होंने सेना का भी जिक्र किया.
नई दिल्ली/ हैदराबाद, 5 नवंबर, 2025. बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का चुनाव प्रचार मंगलवार को खत्म हो गया. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 4 नवंबर ( मंगलवार) को इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के समर्थन में औरंगाबाद में प्रचार किया. इस दौरान उन्होंने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि सेना देश की 10% आबादी के नियंत्रण में हैं. दरअसल, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बिहार में औरंगाबाद जिले के कुटुंबा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सेना और बड़े संस्थान सिर्फ 10% आबादी के कंट्रोल में है, जबकि 90% लोग दलित, पिछड़े, अत्यंत पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय कहीं भी प्रतिनिधित्व नहीं पाते हैं.
राहुल गांधी ने क्या-क्या कहा ?
अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा अगर आप ध्यान से देखेंगे तो देश की 90% आबादी दलित, महादलित, पिछड़ा, अत्यंत पिछड़ा या अल्पसंख्यक समुदाय से आती है. 90% लोग समाज के सबसे पिछड़े और आदिवासी वर्गों से हैं अगर आप भारत की 500 से बड़ी कंपनियों की सूची निकलेंगे तो उसमें पिछड़े या दलित समुदाय का कोई व्यक्ति नहीं मिलेगा. राहुल गांधी ने कहा कि सभी उसी शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी से आते हैं. सारी नौकरियां उन्हीं के पास जाती है. उनके हाथ में सेना का नियंत्रण है. देश की बाकी 90% आबादी का कहीं प्रतिनिधित्व दिखाई नहीं देगा. इसके अलावा राहुल गांधी ने कहा कि हम ऐसा भारत चाहते हैं जिसमें देश की 90% आबादी के लिए जगह हो, जहां लोग सम्मान और खुशी से जी सकें. कांग्रेस पार्टी हमेशा से पिछड़ों के अधिकार की लड़ाई लड़ती रही है.
बीजेपी ने लपका राहुल का बयान
राहुल गांधी ने जातीय कार्ड के दौरान सेना का भी जिक्र कर दिया तो बीजेपी ने राहुल के बयान को लपक लिया.
भाजपा प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने कहा, राहुल गांधी अब सेना में जाति ढूंढ रहे हैं और कह रहे हैं कि 10% लोग इसे नियंत्रित कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी नफरत अब भारत के प्रति नफरत में बदल गई है .
राहुल गांधी के बयान पर भाजपा नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का यह बयान न केवल सेना का अपमान है बल्कि देश की एकता और अखंडता के खिलाफ भी है. अब बीजेपी से बिहार में चुनावी मुद्दा बन सकती है ऐसा अनुमान है.