पहले इनकार, फिर इकरार… ममता ने दे दी कांग्रेस को गुड न्यूज़

बजट सत्र के पहले चरण के आखिरी सप्ताह में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव नोटिस दिया था. संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण कल यानि सोमवार 9 मार्च से आरंभ हो रहा है और उसी दिन इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है.

नई दिल्ली/ कोलकाता, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव में कांग्रेस को अब ममता बनर्जी का भी साथ मिलते दिख रहा है. सूत्र बताते हैं कि टीएमसी अब इस अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट करेगी . इससे पहले टीएमसी सांसदों ने इस अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे. शुरुआत में टीएमसी का कहना था कि सीधे अविश्वास प्रस्ताव लाने के बजाय पहले अध्यक्ष को पत्र लिखकर 3 दिन का वक्त दिया जाना चाहिए, लेकिन अब विपक्षी एकता के मद्देनजर टीएमसी ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट करने का निर्णय लिया है. हालांकि, बजट सत्र के पहले चरण के आखिरी सप्ताह में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया था . संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण कल यानि सोमवार 9 मार्च से आरंभ होगा और उसी दिन इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है.

अविश्वास प्रस्ताव पर क्या बोली कांग्रेस

इससे पहले कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए लाया गया प्रस्ताव संसदीय नियमों और परंपराओं के अनुरूप है एवं इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए. विपक्ष ने अपने प्रस्ताव में आरोप लगाया है कि अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के संचालन में ‘ खुलकर भेदभाव ‘ किया है और कई मामलों में सत्ता पक्ष के पक्ष में फैसले दिए हैं .

क्या है ? विपक्ष के आरोप

विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव में अध्यक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसमें कहा गया है कि उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई सांसदों को बोलने की अनुमति नहीं दी . इसके अलावा 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित करने, महिला सांसदों पर कथित रूप से ‘ अनुचित आरोप ‘ लगाने और सत्तारूढ़ दल के कुछ सांसदों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कार्रवाई न करने का भी आरोप लगाया गया है. संसदीय नियमों के मुताबिक, अध्यक्ष इस प्रस्ताव पर चर्चा के वक्त सदन में मौजूद रह सकते हैं, लेकिन वे स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे. उन्हें अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देने का भी मौका मिलेगा.

क्या कहता है संख्या बल ?
दरअसल, मौजूदा संख्या बल को देखते हुए इस अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने की उम्मीद बेहद कम मानी जा रही है क्योंकि लोकसभा में 541 सदस्यों की मौजूदा ताकत में सत्तारूढ़ एनडीए के पास 293 सांसद हैं, जिससे प्रस्ताव का गिरना करीब करीब तय माना जा रहा है .