गैस सप्लाई में कमी का अब श्मशान घाट तक भी असर

समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट

पुणे / चेन्नई/ कोच्चि, 13 मार्च 2026. गैस सप्लाई ( एलपीजी) में कमी के कारण पुणे और भुवनेश्वर जैसे शहरों में श्मशान घाट प्रभावित हुए हैं, जहां गैस — आधारित अंतिम संस्कार रुकने से लकड़ी( पारंपरिक विधि) का उपयोग बढ़ रहा है. इस हालात से परेशान लोग या तो लंबा इंतजार कर रहे हैं या पारंपरिक लकड़ी से अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं , जो पर्यावरण के लिए चिंताजनक है.

श्मशान घाट पर गैस संकट और सेवाएं ठप
पुणे के बैकुंठ धाम जैसे श्मशान घाटों में गैस आधारित इकाइयां एलजी की कमी के कारण अस्थाई रूप से बंद हो गई है. हालांकि, गैस की कमी के कारण शवों को जलाने के लिए लकड़ी की मांग बढ़ गई है, जिससे लकड़ी प्राप्त करना भी कठिन हो रहा है. दरअसल, नगर निगमों को गैस की कमी के कारण व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है. आम जनता को अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार में देरी का सामना करना पड़ रहा है. कुछ लोग लकड़ी के उपयोग को ही एक विकल्प के रूप में अपना रहे हैं.

परंपरा और पर्यावरण
कुछ लोग पर्यावरण के दृष्टिकोण से पारंपरिक लकड़ी की जगह गैस शवदाह को प्राथमिकता दे रहे थे, लेकिन अब स्थिति बदलने से वे परेशान है. यह संकट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय ईंधन की कमी और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण उत्पन्न हुआ है.

अब केरल के श्मशान घाटों पर भी गैस की कमी का असर
कोच्चि के कई गैस आधारित श्मशान घाट बंद है, जिसके कारण उन्हें लकड़ी आधारित सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है. जबकि गैस सप्लाई में आई भारी कमी और पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते पुणे और चेन्नई जैसे नगरों में भी श्मशान घाटों पर गैस आधारित अंतिम संस्कार प्रभावित हो रहे हैं. खबर है कि पुणे में गैस की कमी के कारण कम से कम 18 गैस शवदाह गृह बंद कर दिए गए हैं, जबकि बैकुंठ धाम जैसे मुख्य शमशान घाटों पर अब गैस से चलने वाली भट्टी बंद होने से, शवों के दाह संस्कार के लिए लकड़ी या इलेक्ट्रिक सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है. मिली जानकारी के मुताबिक, चेन्नई में भी एलपीजी की कमी के चलते श्मशान घाटों को सिलेंडरों की बुकिंग में भारी बाधा उत्पन्न हो रहा है.