11 विधायकों ने दिया धोखा


नई दिल्ली, 18 मार्च 2026. राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस के 11 विधायकों ने पार्टी के निर्देशों की अवहेलना की है. इस घटना ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि जब कांग्रेस विपक्ष में होती है, तो केंद्र और राज्य दोनों स्तरों के चुनाव उसकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित होते हैं.

कहां- कहां हुई बगावत ?

हरियाणा : कांग्रेस के 5 विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर वोट किया. इसके अलावा यहां 4 वोट अमान्य घोषित किए गए, जिसे कांग्रेस ने साजिश करार देते हुए आरोप लगाया है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने बीजेपी के एजेंट की तरह काम किया .

ओड़िशा : यहां तीन विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया. जिससे कांग्रेस और बीजेडी समर्थक प्रत्याशी की हार हुई.

बिहार: यहां कांग्रेस के 3 विधायकों ने मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं लिया( वोटिंग से परहेज किया ). जिन प्रदेशों में कांग्रेस विपक्ष में है, वहां राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में बार-बार होने वाली यह बगावत या क्रॉस वोटिंग मुख्य रूप से दो कारणों का नतीजा है. बीजेपी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ दालों का प्रभाव या फिर पार्टी के भीतर की गुटबाजी.

निराशा और गुटबाजी का असर

हालांकि, पिछले दो चुनाव हारने के बाद कांग्रेस इस बार हरियाणा में राज्यसभा चुनाव जितने में कामयाब रही, लेकिन बिहार और ओड़िशा में अपने सहयोगियों को फायदा पहुंचाने की उसकी कोशिशें बुरी तरह नाकाम रही. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यों की सत्ता से बीजेपी को बेदखल करने में कांग्रेस की सफलता इसका एक बड़ा कारण है. सत्ता में वापसी न कर पाने की वजह से पार्टी के चुने हुए विधायकों में काफी निराशा है, जिससे वे सत्तारूढ़ दल के लिए आसान शिकार बन जाते हैं. ओड़िशा और बिहार में विधायकों की बगावत को इसी का परिणाम माना जा रहा है. दूसरी तरफ, हरियाणा में गुटबाजी ने बड़ी भूमिका निभाई है. इसका उदाहरण अतीत में भी देखने को मिला है, जब क्रॉस वोटिंग करने वाले किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई जैसे कांग्रेसी विधायक बाद में बीजेपी में शामिल हो जाते हैं.

धनबल और धमकियों का कॉकटेल

पार्टी के कई अंदरूनी सूत्रों और राज्य प्रभारियों ने इस स्थिति पर लाचारी जताई है. उनका कहना है कि सत्ता पक्ष की तरफ से मिलने वाले धनबल ( प्रलोभन) के प्रभाव को बेअसर करना आसान नहीं है, क्योंकि इसके साथ ही सत्तारूढ़ दल की धमकियों का डर भी जुड़ा होता है. सूत्र बताते हैं कि जिन विधायकों के अपने व्यावसायिक ( बिजनेस) हित जुड़े होते हैं, वे इस तरह के प्रलोभनों और धमकियों के आगे जल्दी घुटने टेक देते हैं. हालांकि, इन तमाम चुनौतियों और रिटर्निंग ऑफिसर के बीजेपी एजेंट की तरह काम करने के आरोपों के बावजूद, हरियाणा में पार्टी की जीत का श्रेय कांग्रेस के मजबूत नेतृत्व और एकजुट प्रदेश कांग्रेस इकाई को दिया जा सकता है.