
पश्चिम एशिया युद्ध का असर विधानसभा चुनावों पर, महंगाई मोदी सरकार के लिए नई चुनौती ?
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों पर पश्चिम एशिया युद्ध संकट का असर दिख सकता है. ईरान पर हमलों के बाद कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से भारत में महंगाई का खतरा बढ़ गया है . एलपीजी, उर्वरक और आयत महंगे होने से चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है, जिसे विपक्ष राजनीतिक मुद्दा बन सकता है.
नई दिल्ली/ कोलकाता/ चेन्नई/ गुवाहाटी, 20 मार्च 2026. पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. इन चुनावों में यूं तो राज्यों के मुद्दे हावी रहने चाहिए या राष्ट्रीय स्तर के कुछ मुद्दों को हवा देने की कोशिश हो सकती है, लेकिन एक वैश्विक पहलू भी इसमें जुड़ गया है. इस किस्से का सिरा जुड़ा है ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से . इसे पैदा होने वाली चुनौती एनडीए को भी तकलीफ दे सकती है और राज्यों में सत्तारूढ़ दलों को भी.
महंगाई बढ़ने का डर
पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस की कीमतें बढी है और भारत में इनकी आपूर्ति प्रभावित हुई है. जनवरी में 65 से 66 डॉलर प्रति बैरल पर रहा कच्चा तेल अब 100 डॉलर के पार है. भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है और इसका करीब आधा हिस्सा होमुर्ज स्ट्रेट से आता रहा है . भारत के एलएनजी इंपोट का करीब 60% हिस्सा कतर और यूएई जैसे देशों से होमुर्ज स्ट्रेट के जरिए आता रहा है. एलपीजी में चुनौती इसलिए बड़ी हो गई है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 60% हिस्सा आयात करता है, लेकिन इसका 90% तक होमुर्ज स्ट्रेट से आता रहा है.
भारत में महंगाई का खतरा
क्रूड सप्लाई और पेट्रोल डीजल के मामले में ज्यादा दिक्कत नहीं है क्योंकि रूस से ज्यादा क्रूड खरीद होने लगी है और पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स के चौथे बड़े निर्यातक भारत में फिलहाल तंगी की स्थिति नहीं है. लेकिन ऋषि तेल अब पहले जैसा सस्ता नहीं रहा. मौजूदा संकट में उसके भाव भी बढ़ गए हैं. समीकरण यह है कि क्रूड ऑयल अगर अगले 10 से 12 महीनों में 110 से 115 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, तो इसके आयात का सालाना बिल 65 बिलियन डॉलर तक बढ़ जाएगा. इसे भारत को और ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे . इससे रुपया और नीचे आएगा. तमाम चीजों का आयात महंगा होता जाएगा. वे चीजें तो महंगी होगी ही, उनसे देश में बनने वाला माल भी महंगा हो जाएगा . यानी कुल मिलाकर महंगाई उछलने का रिस्क बनता दिख रहा है . हालांकि, यह महंगाई इन विधानसभा चुनावों के चार-पांच महीने पहले से बढ़ने लगी थी. मार्च में ईरान संकट के असर से यह और उछलेगी. इसके बाद अप्रैल में चुनाव होना है. बंगाल में तो अप्रैल के आखिरी दिनों में मतदान है . भाजपा कहती रही है कि यूपीए शासनकाल में महंगाई दर बहुत ज्यादा हुआ करती थी और मोदी शासन में इस पर काबू पाया गया है. लेकिन एलपीजी के मसले पर निशान साध रहे विरोधी दल महंगाई को भी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकते हैं.